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कविता बुन लेता हूँ

शोर-शराबे में भी दिल की धड़कन सुन लेता हूँ यूँ कविता बुन लेता हूँ इस दुनिया के छोटे-छोटे हिस्से घूम रहे हैं लोग नहीं हैं, दो पैरों पर किस्से घूम रहे हैं होंठों पर मुस्कान दिखी, मस्तक ग़मगीन दिखे हैं हर चेहरे को पढ़कर देखो, कितने सीन लिखे हैं इस सारी सामग्री में से मोती...

जैन आगम की प्रासंगिकता

धर्म आत्मबल में वृद्धि करने का साधन है। साधना संहनन को सुदृढ़ करने का अभ्यास है। विपरीत परिस्थितियों में स्वयं को संयत रखने का उपाय ही व्रत है। जैन आगम का प्रथमानुयोग, जीव के इसी नैतिक विकास का आधार तैयार करता है। प्रथमानुयोग हमें संकट के समय संयत रहने के अवलम्बन...

हिंदुस्तान बोलेगा

अगर इंसान बनकर आए तो इंसान बोलेगा ज़ुबां मिसरी सरीखी मीर का दीवान बोलेगा अगर हैवानियत लेकर इधर आए तो फिर सुन लो शिवाजी की ज़ुबां में सारा हिंदुस्तान बोलेगा ✍️ चिराग़...

दूसरा आयाम

जो प्रतीक्षा आँख में शबरी बसाए जी रही है वह प्रतीक्षा राम के भी पाँव में निश्चित मिलेगी धूप जैसी जिस विकलता को सुदामा ने जिया है वह विकलता द्वारिका की छाँव में निश्चित मिलेगी जो महल तक आ गयी होगी युगों का न्याय लेने वह किसी वन में सिसकती इक शिला की आह होगी जो युगों...

दिल खोलकर…

अपने रोग का संज्ञान होने से लेकर अब तक की यात्रा में जो कुछ जीवन सीखने का अवसर मिला, उसके लिए यह सारा कष्ट बड़ा मोल नहीं है। पहली बार पता लगा कि लोगों की धूर्तता ही नहीं, बल्कि उनकी सहृदयता पर भी एक आवरण चढ़ा होता है, जो ऐसे ही समय में अनावृत होता है। मोर्चे पर खड़े...
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