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प्रेम-तीर्थ

मुम्बई में जुहू-चौपाटी पे शाम सात बजे बाद; परिवार संग नहीं जाना चाहिए आगरे में बालकों को ताज और प्रेमिका को पालिवाल गार्डन में घुमाना चाहिए बैंगलोर वाले लाल बाग़ जैसा कोई एक प्रेमियों को देश भर में ठिकाना चाहिए जहाँ पहले हैं, वहाँ और सुविधाएँ मिलें जहाँ पे नहीं हैं...

वो शालीन पल

हाँ, गुज़ारे थे कभी दो-तीन पल कुछ हसीं, कुछ शोख़, कुछ रंगीन पल हर तरह की वासना से हीन पल अब कहाँ मिलते हैं वो शालीन पल भोग, लिप्सा, मोह के संगीन पल कब किसे दे पाए हैं तस्कीन पल आपका आना, ठहरना, लौटना इक मुक़म्मल हादसा थे तीन पल साथ हो तुम तो मुझे लगता है ज्यों हो गए हैं...

सितारों की तरह

हो गई है ज़िन्दगी अपनी सितारों की तरह देखते हैं लोग भी अब तो नज़ारों की तरह जो चले थे काम करने कामगारों की तरह वो उनींदे से खड़े हैं अब कतारों की तरह सब शिकारी की तरह घर से निकलते हैं मगर सब फँसे मिलते शिकंजे में शिकारों की तरह आपके हालात की बेइंतहा मज़बूरियाँ और मेरे...

दर्द की दास्तान

दर्द की दास्तान सुन लेना ख़ुद-ब-ख़ुद साहिबान सुन लेना होंठ मेरे न कुछ कहेंगे मगर आँसुओं का बयान सुन लेना ✍️ चिराग़...

हक़ीक़त

सितम का दर्द होता है बहुत गहरा नहीं छिपता मेरी नज़रों से आँसू का कोई क़तरा नहीं छिपता किसी के होंठ कितनी भी अदाकारी करें लेकिन बनावट से हक़ीकत का कभी चेहरा नहीं छिपता ✍️ चिराग़...
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