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तुझको कुछ भी याद नहीं?

तेरी पलकों में सपनों की दुनिया अब आबाद नहीं मेरी यादें तेरे दिल तक पहुँचाती आवाज़ नहीं तुझको कुछ भी याद नहीं? तू मुझको रजनीबाला का मूर्तरूप सी लगती थी बातें तेरी, मुझे पौह की मधुर धूप सी लगती थी तेरा यौवन मुझे पंत की सोनजुही में दीखा था तूने मेरी यादों में रातों को...

रिसाला

याद है मुझको अभी भी मैंने तुमको एक जीती-जागती कविता कहा था। सुन के तुम शरमा गई थी खिलखिलाकर हँस पड़ी थी और फिर अपने उसी नटखट हसीं अन्दाज़ में चेहरे पे इक विद्वान-सी मुद्रा सजाए मेरी आँखों में उतर आई थी तुम। याद है मुझको कि उस लम्हा बिना सोचे ही तुमने टप्प से उत्तर दिया...

मिलन का क्षण

प्यार के दो बसन्ती लम्हें छू गए और सूखा हुआ मन हरा हो गया सीप को बून्द का बून्द को सीप का प्रीत को प्रीत का आसरा हो गया पर्वतों से निकल कर लगी दौड़ने धूप में बर्फ बन कर गली इक नदी पत्थरों से लड़ी, जंगलों से घिरी अनबने रास्तों पर चली इक नदी जब नदी ने समन्दर छुआ झूम कर वो...

याद

कभी जब नीम की डाली पे चिड़ियाँ चहचहाती हैं हज़ारों ख्वाहिशें दिल में तड़पकर कुलबुलाती हैं मेरे आगे से जब भी ख़ुशनुमा मंज़र गुज़रते हैं किसी की याद में भरकर ये आँखें छलछलाती हैं ✍️ चिराग़...

क़हक़हे

बिल्कुल ख़ाली कर दिया है मैंने दिल का भरा-पूरा मकान आँखों की बाल्टी में आँसुओं का पानी भरकर धो डाला है मकान का एक-एक कोना …काफ़ी दिन हुए। लेकिन अब भी गूंजते हैं यादों के क़हक़हे टकराकर ख़ाली मकान की ख़ामोश दीवारों से। और मैं फिर से धोने लगता हूँ दिल के मकान की उदास...
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