Chirag Jain Writings, Diary, Ek Adad Kirdar, Prose
आह! हिंदी के शौर्य जा सूरज डूब गया। कवि सम्मेलनों में दिनकर की ऊष्मा को उग्र करके जीवित रखने वाला अमर रथ ऊर्ध्वगामी हो गया। कविता की वर्तिका की जाज्वल्यमान आभा खो गई। कड़वा है, पर सत्य है बैरागी जी नहीं रहे। आज शाम गोधूलि वेला में वे दिनकर के संग अस्त हो गए। जीवंत इतने थे कि आयु की विवशताओं के सम्मुख घुटने टेक कर कभी निष्क्रिय नहीं हुए। आज दोपहर तक मनासा में एक कार्यक्रम में शिरक़त करके लौटे और ज़िन्दगी को अभिमान से कह गए कि अंतिम श्वास तक सक्रिय रहा हूँ। संघर्षों की भट्ठी में तपकर दमकी एक रौशनी बुझी है आज। इन तूफानों की रफ्तार बता रही है कि कोई बहुत विशाल वटवृक्ष धराशायी हुआ है। प्रणाम दद्दू!
✍️ चिराग़ जैन
Ref : Demise of Balkavi Bairagi
Chirag Jain Writings, Diary, Ek Adad Kirdar, Prose
हरियाणा और हिमाचल के संगम पर एक छोटा सा कस्बा है – काला अम्ब। दोपहर बाद जब यहाँ पहुँचे तो उदासी और वीराने के दर्शन हुए। सूखी हुई पहाड़ी नदी, ट्रैफिक, धूप और बेतरतीब सी शहरी ज़िन्दगी जी रहे लोग। लेकिन ज्यों-ज्यों शाम ढली, त्यों त्यों इस उदासी में उत्सव पैर पसारने लगा। हिमालयन ग्रुप ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज़ के परिसर में रौशनी सिंगरने लगी। पहाड़ से उतरी हुई ठंडी हवाओं ने उमस का तख्ता पलट दिया।
यूकलिप्टस के ऊँचे वृक्षों पर टंगा हुआ आधा चाँद ऐसा लगता था मानो आसमान के गाढ़े अंधेरे ने काले धागे सोने का तावीज पहन रखा हो। शिक्षण संस्थान के वार्षिकोत्सव से निकसित स्वर लहरियाँ हवा के सोर में गुंथकर मटके और बीन का संगीत निर्मित करती थीं।
परिसर के भीतर श्रोतादीर्घा भारत के लोकतंत्र का संपूर्ण चित्र प्रस्तुत करती थी। अध्यात्म के प्रतिनिधित्व में ब्रह्मचारी ब्रह्मस्वरूप जी, न्यायपालिका की ओर से जस्टिस मित्तल और तीन अन्य न्यायाधीश, विधायिका की ओर से कम्बोज जी और असीम गोयल जी, पत्रकारों का विशाल समूह, सशस्त्र सैन्य बल, व्यापारी समूह, अध्यापक वृन्द, विद्यार्थी, कर्मचारी और कवियों में पद्मश्री सुरेन्द्र शर्मा, कर्नल वीपी सिंह, शम्भू शिखर, गजेंद्र प्रियांशु और चिराग़ जैन।
राजनैतिक व्यंग्य, ठहाके, श्रृंगार के मधुर गीत तथा भारत के शौर्य का यशगान। शहीदों की श्रद्धांजलि हेतु दो ढाई हज़ार श्रोताओं का समूह शौर्य की हुंकार के साथ खड़ा हो गया। कवि सम्मेलन में आँसू और मुस्कान का सुयोग देखने को मिला।
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Diary, Ek Adad Kirdar, Prose
हिंदी कवि सम्मेलनों की अपनी डेढ़ दशकीय यात्रा में हर वरिष्ठ ने कुछ न कुछ सिखाया है। यात्राओं में लगभग सभी के साथ अच्छा समय बिताया है। इस डेढ़ दशक में मुझे ज्ञात हुआ कि हर शख़्स अपनी सीमित बुराइयों और असीमित अच्छाइयों के साथ जीता है। इस डेढ़ दशक में मैंने जाना कि हर बड़ा व्यक्ति भीतर से एक बेहद प्यारा और मासूम बालक ही होता है। जीवन की इस पाठशाला में जिन्होंने मुझे ज़िंदादिली और सकारात्मकता के अध्याय पढ़ाए उनका नाम है – अरुण जैमिनी। बड़ी से बड़ी घटना को हँस कर टाल देना, कठिन से कठिन परिस्थिति में संयत रहना और हर इंसान के अस्तित्व को सम्मान देना उनके व्यक्तित्व की विशेषता है। ठहाके और मस्ती उनकी उपस्थिति का अंश हैं। चिंता करना, घबराना, परेशान हो जाना और विचलित होना उन्होंने जैसे सीखा ही नहीं। स्वयं की सुविधाओं को प्राथमिकता देने के बावजूद वे कभी किसी के सुख में अवरोधक नहीं बनते। बड़े होने का अहंकार और लोकप्रिय होने का दम्भ कम से कम मैंने तो उनके व्यक्तित्व में कभी नहीं देखा। आयु में उनसे लगभग आधा और प्रसिद्धि में उनसे चौथाई होने के बाद भी मैंने उनसे हमेशा एक मित्रता का संबंध ही पाया है। उनका जीवन आज साठ साल पूर्ण कर रहा है। ये साठ वर्ष की अवधि हर उस संघर्ष से सुसज्जित है जो एक सामान्य मनुष्य को झेलना पड़ता है लेकिन इस सब संघर्षों में अपने भीतर के अरुण जैमिनी को बचाए रखना एक असामान्य घटना है।
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Diary, Ek Adad Kirdar, Prose
बैंकाक में काव्यपाठ के उपरांत पटाया भ्रमण का निर्णय हुआ। थाईलैंड की खाड़ी पर बसा यह रंगीन शहर अपनी विलासिता के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है। मुम्बई जैसी ऊमस भरे मौसम में भी लोगों की ऊर्जा में कोई कमी नहीं है। प्रदूषण और गंदगी से पूरी तरह मुक्त यह शहर सैलानियों की पसंदीदा जगह है। नारियल की मिठास यहाँ सामान्य से अधिक है। आम का मौसम है इसलिए आम और लीची बेचने वाले हर सौ कदम पर मिल जाते हैं। थाई महिलाएँ बेहद परिश्रमी होती हैं। समुद्र किनारे रेस्तरां चलाने से लेकर मसाज पार्लर्स में काम करने तक हर जगह उनकी ऊर्जा यथावत है। थाई पुरुष टैक्सी या मोटरबाइक पर सैलानियों की दूरियाँ कम करते हैं। गौतम बुद्ध के प्रति आस्था पूरे देश में अनवरत प्रसारित है। महाराज जनक के समान थाईलैंड का शरीर भी एक ही समय में आधा भोग में रत है और आधा साधना में। एक ओर स्वर्णाभ बुद्ध बिंब और थाई वास्तु से सुसज्जित पैगोडा मन को तृप्त करते हैं वहीं दूसरी ओर वाकिंग स्ट्रीट जैसे बाज़ार तन की थकान दूर करते हैं। भारत की तरह यहां भी अमलतास के कंगूरे खिल उठे हैं। दूर पश्चिम में सूर्यदेव अस्ताचलगामी हो गए हैं। उनकी कांति से स्वर्णदेही तथागत और भी भव्य हो उठे हैं। बाज़ारों में रंगीनियां बढ़ने लगी हैं। दिन भर की ऊमस को पदच्युत कर समुद्री हवाओं ने सत्ता सम्भाल ली है। हमने पटाया को स्वतदिखरप कहा और बैंकाक रवाना हो गए।
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Muktak, Poetry
दीवानेपन में दुनिया के सफहे मोड़ गए हैं यार
आशिक अपने नाख़ूनों से पर्वत तोड़ गए हैं यार
ख़ाक़ कहेगा कोई अब इस महफ़िल में कुछ बात नई
तुलसी, मीर, कबीर सभी कुछ लिख कर छोड़ गए हैं यार
✍️ चिराग़ जैन