+91 8090904560 chiragblog@gmail.com

विजय का मंत्र

जो समर्पित हो गया मजबूर होकर वह तुम्हारा हित करेगा; भूल जाओ जो न अपने मन मुताबिक जी रहा हो वह तुम्हारे हित मरेगा; भूल जाओ कर्ण इक एहसान के वश में विवश थे द्रोण इक प्रतिशोध के कारण खड़े थे शल्य इक षड्यंत्र से आहत हुए थे भीष्म इक प्रण की विवशता में लड़े थे मन बचा पाया...

मूल प्रवृत्ति

सामान्यतया राम की मूर्ति धनुष से पहचानी जाती है, और राम का चरित्र मृदुता से! इसके ठीक विपरीत कृष्ण की मूर्ति बाँसुरी से पहचानी जाती है किन्तु कृष्ण का चरित्र एक योद्धा का चरित्र है। राम कंधे पर धनुष रखकर विनम्र जीवन जीते हैं और कृष्ण अधरों पर बाँसुरी रखकर राजनैतिक...

अश्लीलता के मआनी

अधिकारों की ओट में छिपकर उच्छृंखल हो जाना भी उतना ही अश्लील है, जितना संस्कृति की ओट में छिपकर शालीन बनने का ‘दिखावा’ करना। नैतिकता की परिभाषा, काल-पात्र-स्थान के अनुरूप बदल जाती है। शालीनता केवल यौन आचरण तक ही सीमित नहीं है। समय तथा परिस्थिति के अनुरूप आचरण न करते...

शांति बनाम उन्माद

जो शांति का उपाय खोजने के लिए अन्तिम प्रयास तक जूझता रहे, उसे शांतिदूत कहा जाता है। जब दोनों ही पक्ष ख़ून-ख़राबे के उन्माद में हों तथा किसी तरह शांति का उपाय न सूझ रहा हो, उस समय भी शांति का उपाय खोजना ऐसा ही है, ज्यों सींग भिड़ाए खड़े दो बिजारों को लड़ने से रोकना हो। इस...

मुबारक हो, मुहब्बत मर रही है

सभी की आँख में अंगार बोये जा चुके हैं सभी की बोलियों में ख़ार बोये जा चुके हैं। सभी की मुट्ठियाँ भिंचने लगी हैं लकीरें बेसबब खिंचने लगी हैं सभी के दाँत अब पिसने लगे हैं पुराने ज़ख़्म फिर रिसने लगे हैं ये जलवा भी सियासत कर चुकी है हर इक दिल में शिक़ायत भर चुकी है सुना है...
error: Content is protected !!