Blank Verse, Chintan ke Swar, Chirag Jain Writings, Poetry
सादगी के आँगन में
चहकी है, खेली है
हाव-भाव बदले तो
ज़िंदगी अकेली है
ओढ़ी हुई बातों से
कष्ट में धकेली है
सहजता सफलता की
पक्की सहेली है
एक तरफ़ जकड़न है
क़ातिल शिकंजा है
नाख़ूनी रंजिश है
नफ़रत है, पंजा है
उसी के ज़रा पीछे
प्यार की हवेली है
सहजता से खुली हुई
गुदगुदी हथेली है
बचपन से सीखा है
उत्तर उन्हीं में है
जिन शब्दों से मिलकर
बनती पहेली है
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Geet, Poetry, Unpublished Geet
यूँ तो हम युग के शिलालेखों पे अंकित हो गए
जो जिए हमने वो सारे दिन अलंकृत हो गए
किन्तु जब युग की टहनियों पर नई कोंपल उगी
तो हरे पत्ते हवाओं से सशंकित हो गए
जब हमारी श्वास में सरगम सजी आनन्द था
हम उठे, जग ने गई रस्में तजीं आनन्द था
जब हमारी गुनगुनाहट राग बनकर पुज गई
थपकियों से बन गई तालें, अजी आनन्द था
किन्तु जब युग में नई बन्सी बजी तो क्या हुआ
क्यों हमारे पीर वाले तार झंकृत हो गए
कुल मिलाकर ज़िन्दगी है चार पहरों की तरह
हर किसी का वक़्त चढ़ता है दुपहरों की तरह
सांझ को दुल्हन सी सजती है सभी की ज़िन्दगी
और फिर सूरज ढलक जाता है चेहरों की तरह
ब्रह्म की संज्ञा भी दे सकते थे अंतिम प्रहर को
क्यों सवेरों का निरादर कर कलंकित हो गए
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Doha, Poetry
उत्सव हो, आह्लाद हो, हो अनुपम उल्लास।
अधरों पर मुस्कान हो, अन्तस में मधुमास।।
✍️ चिराग़ जैन
Blank Verse, Chirag Jain Writings, Lapete Mein Netaji, Poetry
दिल्ली का चुनाव
चुनाव नहीं
बबाल था
एक तरफ़ पूरी बीजेपी थी
एक तरफ़ केजरीवाल था।
बीजेपी ने अपने रास्ते में
पहली खाई तब खोदी
जब दिल्ली जैसे छोटे चुनाव के लिये
रामलीला मैदान से दहाड़े थे पीएम मोदी।
और जीती हुई बाज़ी
विरोधियों के हाथ में तब देदी
जब सबके मना करने के बावज़ूद
छाँट कर लाए अपनी बुआ, बेदी।
इस फ़ैसले के बाद
दिल्ली के सारे लीडर
विभीषण हो गये
और सफ़लता के रास्ते
जो सुगम थे, अब भीषण हो गये।
उस पर और भी महान
साध्वियों और महाराजों के बयान
ऊपर से बेलगाम
किरण बेदी जी की ज़ुबान।
दुर्भाग्य का मास्टर पीस
एनडीटीवी के रवीश
जो कसर रह गई थी
वो भी पूरी कर दी
मैडम बेदी की हक़लाहटों के गले में
कुटी हुई मुलहठी भर दी।
मनोज तिवारी की लफ़्फ़ाज़ी
अमित शाह की जुमलेबाज़ी
जीत के नशे से चढ़ा गुमान
नये मेहमानों के लिये पुराने साथियों का अपमान
दिल्ली के सांसदों की कार्यकर्ताओं पर पकड़
और विजय रथ पर सवार चेहरों की अकड़
इन सब प्रहारों से प्रतिष्ठा का क़िला ढह गया
और कार्यकर्ताओं की अनदेखी करता नेतृत्व
एक-एक वोट के लिये तरसता रह गया
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Muktak, Poetry
लाख दे कोई दलीलें, दिमाग़ की लेकिन
कुछ भी काफ़ी नहीं इस दिल के संभलने के लिए
ज़िन्दगी एक सफ़र है जहां का सच ये है
लोग मिलते ही हैं इक रोज़ बिछड़ने के लिए
✍️ चिराग़ जैन
Blank Verse, Chirag Jain Writings, Poetry, Unpublished Geet
लो मान लिया ये राजनीति छल-छद्मों की इक मंडी है
लो मान लिया इस महफ़िल की हर सूरत बहुत घमंडी है
लेकिन हमने भी कब पुरख़ों के सपनों का सम्मान किया
70 वर्षों में कहीं कभी क्या 100 प्रतिशत मतदान किया
ये लोकतंत्र जनप्रतिनिधियों की करनी का हरकारा है
हम चुन कर प्रत्याशी भेजें इतना तो काम हमारा है
आज़ादी की परवाज़ों में सीमाओं के कन्ने भी हैं
अधिकारों की बातें हैं तो, कर्तव्यों के पन्ने भी हैं
कुछ लोग वोट की ताक़त को हल्के में लेते रहते हैं
फिर सत्ता, सिस्टम, शासन को ही गाली देते रहते हैं
उंगली पर स्याही लगी नहीं, सत्ता पर कीचड़ डाल रहे
कर लोकतंत्र की अनदेखी, शासन में दोष निकाल रहे
वोटिंग के दिन पिकनिक जाने वाले भी क्या ग़द्दार नहीं
ऐसे लोगों को शासन की निंदा तक का अधिकार नहीं
हम खाएं क़सम इस बार कोई मत व्यर्थ नहीं जाने देंगे
जनता की मर्ज़ी के बिन अब ना सत्ता हथियाने देंगे
जनता की निष्क्रियता को उनकी ताक़त क्यों बन जाने दें
अपनी मेहनत से सींची फसलें टिड्डों को चर जाने दें
जनता का प्रतिनिधि कैसा हो ये हम सबको तय करना है
अबकी पूरे माहौल को फिर से लोकतंत्रमय करना है
बस एक वोट भी सत्ता की जड़ में मट्ठा भर सकता है
बस एक वोट आकाओं का जबड़ा खट्टा कर सकता है
बस एक वोट सच के रथ का पहला घोड़ा बन सकता है
बस एक वोट झूठों के पथ पर बाधा बन तन सकता है
जो सीना छलनी करता है, उसके सीने पर चोट तो दें
इसको, उसको, चाहे जिसको, हम जाकर अपना वोट तो दें
इस बार फरवरी सात गढ़ेगी नई इबारत दिल्ली में
जब सौ प्रतिशत मतदान से गर्वित होगा भारत दिल्ली में
इस बार वोट की ताक़त का जलवा देखेंगे दिल्ली में
इस बार सही जनमत का इक बलवा देखेंगे दिल्ली में
जिस दिन मेरी इन बातों का सम्पूर्ण असर हो जाएगा
उस दिन समझो इस भारत का गणतंत्र अमर हो जाएगा
✍️ चिराग़ जैन