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एयर इण्डिया

बादलों के बीच तैरता
भारतीयता का रिवाज़ देखिए
आइए साहब
एयर इंडिया का जहाज देखिए

जब ये जहाज उड़ता है ना आसमान में
तो यह अकेला नहीं उड़ता
इसके साथ उड़ती हैं
हज़ारों आँखों की आशाएं
सुरक्षा की सारी परिभाषाएं
किसी की प्रतीक्षा से किया गया वादा
किसी का जीवन बचा लेने का इरादा
किसी का सपना पूरा करने की चाह
किसी का कॅरियर बना देने की परवाह
इस जहाज को
हम भारतीयों ने अपने श्रम से पोसा है
यह जहाज हर मंज़िल पर
सुरक्षित पहुँचने का भरोसा है

जब कोई विदेश जाता है इस जहाज से
तो यात्रा में उसको
अपनत्व का परिवेश मिलता है
विदेश की धरती पर कदम रखने से
एक क्षण पहले तक
उसे आसपास अपना देश मिलता है

सिपाही को मोर्चे पर पहुँचाना हो
आपदा के समय पर
मानव धर्म निभाना हो
मुसीबत में फँसे अभागों की
मदद का सवाल हो
बाढ़ हो, सूनामी हो,
अकाल हो या भूचाल हो
एयर इंडिया का जहाज
हर समय तैनात रहता है
हर मुश्किल में
अपने देशवासियों के साथ रहता है

भीतर झाँको
तो यात्रा की थकान के बीच
सुकून भरी निंदिया है
बाहर से देखो तो
आसमान के माथे पर
सजावटी बिंदिया है
जी साहब
ये एयर इंडिया है
जी हुज़ूर
ये एयर इंडिया है

✍️ चिराग़ जैन

मातम का माहौल न जाने

ज़िद पर आ जाएं तो क्या से क्या कर डालें साहिब जी
नाले के बहते पानी से आग जला लें साहिब जी

दर्द तुम्हारा सुन भी लेंगे, कर भी देंगे ठीक इलाज
लेकिन पहले ख़ुद तो अपने होश संभालें साहिब जी

मातम का माहौल न जाने कितना लम्बा चलना है
पहले अपना बढ़िया से फोटू खिंचवा लें साहिब जी

✍️ चिराग़ जैन

पुलवामा

तैने सोता शेर जगाया है
अब तू ख़ैर मनाइयो
पूरा भारत देश रुलाया है
अब तू ख़ैर मनाइयो

लड़ने के हालात नहीं थे
राही थे, तैनात नहीं थे
मौत उन्हें छू पाई क्योंकि
बंदूकों पर हाथ नहीं थे
उनको धोखे से मरवाया है
अब तू ख़ैर मनाइयो

अब तू देख, उपद्रव होगा
आग उगलता भैरव होगा
अब तक विष पीते आए हैं
अब छाती पर तांडव होगा
तैने तीजा नेत्र खुलाया है
अब तू ख़ैर मनाइयो

रग-रग में ज्वाला भड़की है
जन-जन की बाजू फड़की है
आँसू ने शोले उगले हैं
आँखों मे बिजली कड़की है
तैने अपना काल बुलाया है
अब तू ख़ैर मनाइयो

✍️ चिराग़ जैन

पुलवामा

आँसू भेजे हैं घाटी ने
चिथड़े बीने हैं माटी ने
फिर धोखे से घात किया है
कायरता की परिपाटी ने
अब पापी मतलब समझेगा, धोखे के परिणाम का
अंतिम पन्ना हम लिखेंगे, इस भीषण संग्राम का

छल का शीश नहीं कट पाया, तो यह रण आश्वस्त न होगा
जब तक न्याय नहीं हो जाता, तब तक सूरज अस्त न होगा
युग-युग का इतिहास खँगालो, पाप पराजित होता आया
लंका जलनी है रावण की, राघव का घर ध्वस्त न होगा
वीरों के तूणीर खुलेंगे
सोए शर ज्वाला उगलेंगे
दुःशासन का लोहू लेकर
पांचाली के केश धुलेंगे
तुमने मार्ग स्वयं खोला है, अपने पूर्णविराम का
अंतिम पन्ना हम लिखेंगे, इस भीषण संग्राम का

अनुनय की भाषा को शठ ने, रघुवर की दुर्बलता जाना
शिशुपालों ने मधुसूदन में, अपना काल नहीं पहचाना
इतने अवसर मिलने पर भी, हिंसा का पथ छोड़ न पाए
आदत से लाचार हुए हो, ज्यों कोढ़ी का कोढ़ खुजाना
फिर मस्तक पर बल उभरे हैं
कृष्ण सुदर्शन धार खड़े हैं
फिर अर्जुन के नैन झरे हैं
फिर से सारे घाव हरे हैं
फिर से बिलख-बिलख कर रोया, मंदिर अक्षरधाम का
अंतिम पन्ना हम लिखेंगे, इस भीषण संग्राम का

✍️ चिराग़ जैन

ऋतुराज आया है

बाग की सब क्यारियों के हाथ पीले हो गए हैं
फूल की हर पाँखुरी के ओंठ गीले हो गए हैं
श्वास में सरगम सजाता साज आया है
लग रहा है द्वार पर ऋतुराज आया है

साँस में बहकी हवाओं का नशा सा घुल रहा है
प्रीति की बारिश हुई है, ज्ञान सारा धुल रहा है
पर्वतों को खुशबुओं ने प्यार से छू भर लिया है
वज्र सा अड़ियल हिमालय भी अभी हिल-डुल रहा है
ज्ञानियों के ज्ञान से मन बाज आया है
लग रहा है द्वार पर ऋतुराज आया है

दल भ्रमर का बूटियों के पास मंडराने लगा है
कोयलों ने गीत गाए, आम बौराने लगा है
ठूठ से लिपटी हुई है एक दीवानी लता तो
बाग का वीरान कोना, बाग कहलाने लगा है
दम्भ होकर प्रेम का मोहताज आया है
लग रहा है द्वार पर ऋतुराज आया है

गुनगुनी सी धूप के संग बेल-बूटों का प्रणय है
प्रेमियों को हर नियम के टूट जाने पर अभय है
ठंड से ठिठुरी धरा अंगड़ाइयां लेने लगी है
श्वेत छितरी बदलियों के बीच सूरज का उदय है
मोतियों के थाल में पुखराज आया है
लग रहा है द्वार पर ऋतुराज आया है

✍️ चिराग़ जैन

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