Chirag Jain Writings, Geet, Poetry, Unpublished Geet
प्रेम चलकर आएगा जब तक प्रतीक्षा की गली में
तब तलक संसार भर में प्रीति जीवित रह सकेगी
है समर्पण जब तलक तैयार सब कुछ हारने को
उस घड़ी तक भावना की जीत जीवित रह सकेगी
जब तलक बदली स्वयं बेचैन होकर झर न जाए
तब तलक चातक उसे तकता रहेगा प्यास लेकर
बदलियों की शुष्क लापरवाहियों को क्या पता है
कण्ठ में अटके हुए हैं प्राण इक विश्वास लेकर
मृत्यु से पहले बरस जाओ, पिघल जाओ अगर तुम
तो प्रणयगत साधना की रीति जीवित रह सकेगी
उम्र काटी है शिला ने भी यही विश्वास रखकर
एक दिन मझमें विधाता प्राण भर देंगे परस कर
बेर चख-चख कर कोई शबरी प्रतीक्षारत रही है
इस अभागे प्रेम को स्वीकार लेंगे राम हँसकर
चेतना में प्रीत के अमरत्व का उल्लास भर दो
देह भी हर नियति के विपरीत जीवित रह सकेगी
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Geet, Poetry, Unpublished Geet
जब तुम चल दी राह बदल के
दो आँसू ना आँख से छलके
जब मैंने घर वापस आकर, ख़ुद घर का दरवाज़ा खोला
घर के भीतर घर ग़ायब है, ये घर का हर कोना बोला
जब तुमको आवाज़ लगाई
और न कोई उत्तर पाया
उस पल मुझको रोना आया
यादों के सौन्धे बिस्तर पर, मैं बिल्कुल एकाकी सोया
तब समझा, मैंने क्या खोया, तब मैं फफक-फफक कर रोया
पीठ दुखी तो बाम उठाकर
मेरा हाथ लेप ना पाया
उस पल मुझको रोना आया
जब मैंने अपना बोझा ख़ुद अपने ही कंधों पर ढोया
टूटा बटन लगाने को जब ख़ुद सूईं में धागा पोया
सुबह-सुबह भागादौड़ी में
बटुआ साथ नहीं ले पाया
उस पल मुझको रोना आया
देर रात घर वापिस आकर, जब-जब मैंने खाना खाया
फ्रिज से निकली दाल गर्म करने में मुझको आलस आया
जब भोजन के बाद किसी ने
जूठा बर्तन नहीं उठाया
उस पल मुझको रोना आया
जब इस जीवन से उकताकर, मरने की इच्छा हो आई
कहीं किसी ने आँखें पढ़कर मेरी थकन नहीं सहलाई
‘मरें तुम्हारे दुश्मन’ कहकर
मुझको ढांढस नहीं बंधाया
उस पल मुझको रोना आया
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Muktak, Poetry
आप हर ग़म में ज़रा मुस्कान रखना
हम हर इक मुस्कान में कुछ ग़म रखेंगे
बात सुनने का सलीक़ा आप रखना
बात कहने का सलीक़ा हम रखेंगे
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Muktak, Poetry
इस महफ़िल में चुपचुप बैठी एक क़लम ऐसी है जिसने
ग़ालिब से ग़ज़लें सीखी हैं, तुलसी से चैपाई ली है
अम्बर के उद्दीप्त सितारो, उसको किरणों से दुलराना
जिसने कविता के उपवन में अभी-अभी अंगड़ाई ली है
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Muktak, Poetry
सुबकियाँ गहरे उतर जाती हैं दिल के छोर तक
हिचकियाँ यादों में अटकाती हैं हमको भोर तक
फिक्र और चिंता को लेकर बाहर आता अट्टहास
मन की निर्मलता छलकती है नयन की कोर तक
✍️ चिराग़ जैन
Blank Verse, Chirag Jain Writings, Lapete Mein Netaji, Poetry
वोटों की गिनती भी शुरू नहीं हुई
और एमपी में कमलनाथ को
मुख्यमंत्री बनने की बधाइयां छप गईं
पूरी कांग्रेस पार्टी
इन्हीं हरकतों की वजह से खप गई
अब अगर चुनाव का परिणाम पलट गया
तो उन्हीं बधाइयों के तेल में
हार के पकौड़े तले जाएंगे।
उधर कांग्रेस के स्वघोषित मुख्यमंत्री
राज्यपाल के सामने खीझे थे
क्योंकि जिनके दम पर वे सरकार बनाने चले गए थे
वो तो एग्जिट पोल के नतीजे थे।
पहले कुशवाहा ने साथ छोड़ा
फिर ऊर्जित पटेल ने बम फोड़ा
इससे पहले की सरकार का संतुलन बिगड़ता
लंदन ने सरकार के हाथ में थमा दिया भगौड़ा
एक ही दिन में कितना कुछ घटित हो गया
दिल्ली में सारा विपक्ष संगठित हो गया
एक ही दिन की घटनाओं ने
पूरी राजनीति के सिंहासन हिला डाले हैं
लगता है देश के अच्छे दिन आने वाले हैं
✍️ चिराग़ जैन