+91 8090904560 chiragblog@gmail.com

स्वतन्त्रता

मन के मलंग मतवाले महानायकों की कुर्बानियों का परिणाम है स्वतन्त्रता स्वर की बुलन्दियों ने जो अदालतों में किया क्रान्ति का वो दिव्य यशगान है स्वतन्त्रता शहीदों ने भूख-प्यास सह के बचाया जिसे भारती का वही स्वाभिमान है स्वतन्त्रता लाल-बाल-पाल औ सुभाष जैसे ऋषियों की साधना...

विवशता

चुप-चुप देखती थीं राधिका कन्हैया जी को हौले-हौले उठ रहे शोर से विवश थी साँवरे के पास खींच लाती थी जो बार-बार प्रीत की अनोखी उस डोर से विवश थी इत होरी की उमंग, उत दुनिया से तंग फागुन में गोरी चहुँ ओर से विवश थी लोक-लाज तज भगी चली आई गोकुल में मनवा में उठती हिलोर से...

फागुन की शाम

फागुन की शाम कैसी हवा चली हाय राम जोगियों का दिल धक-धक करने लगा सारी सोच बूझ घास-फूस सी बिखर गई मन को खुमार चकमक करने लगा पीपल का पेड़ सारे पंछियों के संग मिल झूम-झूम मार बक-बक करने लगा और चुपचाप मेरा मानस भी हौले-हौले प्रेम के मृदंग पे धमक करने लगा ✍️ चिराग़...

प्रेम-तीर्थ

मुम्बई में जुहू-चौपाटी पे शाम सात बजे बाद; परिवार संग नहीं जाना चाहिए आगरे में बालकों को ताज और प्रेमिका को पालिवाल गार्डन में घुमाना चाहिए बैंगलोर वाले लाल बाग़ जैसा कोई एक प्रेमियों को देश भर में ठिकाना चाहिए जहाँ पहले हैं, वहाँ और सुविधाएँ मिलें जहाँ पे नहीं हैं...

सुन्दरी

कारे-कारे कजरारे नैन तोरे प्यारे-प्यारे गीले-गीले लागत हैं नदिया के कूल से सौंधी-सौंधी खुसबू महकती है केसन में मानो अभी नहा के आई हो गोरी धूल से मस्तानी की दीवानी मुस्कान देख लें तो रोम-रोम खिले गुलदाऊदी के फूल से मीठी-मीठी बोली, मो से बोले तो मिठाई लागे औरन से बोले...

प्यार वाला अहसास

प्यार वाला एक अहसास जब से जगा है अँखियों से भेद खोलती है मेरी ज़िन्दगी हर घड़ी हर पल दिन-रैन बिन चैन उस ही का नाम बोलती है मेरी ज़िन्दगी अपना तो दिल भूल आई किसी आँचल में अब बावरी-सी डोलती है मेरी ज़िन्दगी मथुरा में बन बनवारी बैठ गई और बृज की हवा टटोलती है मेरी ज़िन्दगी ✍️...
error: Content is protected !!