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प्रेम की तकनीकी चुनौतियां

यूरिया का ज़ोर, हर डाल कमज़ोर, अब
चंपा की टहनिया पे लूम नहीं सकते
एमएमएस बनने का डर लगा रहता है
प्यार के नशे में अब झूम नहीं सकते
प्यार के हज़ार दुश्मन हर मोड़ पे हैं
एक-दूसरे के साथ घूम नहीं सकते
और अब मुआ हैलमेट गले पड़ गया
बाइक पे बैठ के भी चूम नहीं सकते

✍️ चिराग़ जैन

संक्रमण काल

चौपालों पे कितने ठहाके गूंजा करते थे
आज अधरों पे मुस्कान भी नहीं रही
कभी स्वाभिमान तलवारों से दमकता था
आज तलवार छोड़ो, म्यान भी नहीं रही
पेड़ों से घरों की पहचान थी कभी पर अब
पेड़ भी नहीं हैं पहचान भी नहीं रही
नारियों के हाथ में भी आई न व्यवस्था और
हद ये है पुरुष प्रधान भी नहीं रही

✍️ चिराग़ जैन

भारत की तस्वीर

भारत की आज तस्वीर जो बनी हुई है
उसमें पुरानी हर रीत का भी रंग है
हल्दीघाटी वाली एक हार की कसक भी है
पोरस की स्वाभिमानी जीत का भी रंग है
चंद्रगुप्त मौर्य वाले साहस का नूर भी है
चाणक्य शिखा की कूटनीति का भी रंग है
झाँसी वाले शौर्य की कहानी तलवार पे है
पीठ पर ममता की प्रीत का भी रंग है

भारत की वीणा पे जो सरगम गूंजती है
उसमें वीणा के हर तार का भी योग है
क्रांति के बारूदों के धमाकों की धमक भी है
शांति का व मान-मनुहार का भी योग है
तलहट में छिपे खज़ानों की खनक भी है
अभिशाप झेलते बिहार का भी योग है
काम की प्रभावना की अजंता-एलोरा भी है
राम-कृष्ण योग के विचार का भी योग है

बरखा में नृत्यमग्न मोर अनिवार्य है तो
मोर की नमी से भरी कोर भी ज़रूरी है
तुंग हिमगिरि की विशालता आवश्यक है
सागर की गर्जना का रोर भी ज़रूरी है
अवध की सुरमई शाम अनिवार्य है तो
काशी के किनारों वाली भोर भी ज़रूरी है
देश की अखण्डता को पूर्ण करने के लिए
भारती का एक-एक पोर भी ज़रूरी है

✍️ चिराग़ जैन

महाश्रमण

महावीर स्वामी की पुरातन परंपरा के
वर्तमान युग में निशान देख लीजिए
संत के समागम का कैसा है प्रभाव आज
सज उठा कैसे बियाबान देख लीजिए
आभा का प्रभाव है या तप का चमत्कार
सबके दुखों का है निदान देख लीजिए
जहां-जहां चरण पड़े हैं दिव्य श्रमणों के
वहां-वहां तीरथ महान देख लीजिए

पुण्य का उदय है आपके हमारे जीवन में
ऐसे दिव्य पावन सुखद क्षण उतरे
धर्म की सभा में धार्मिकों का समागम है
जैसे महावीर का समोशरण उतरे
अहिंसा के बल पर शासन हो कैसे भला
धरती पे इसके उदाहरण उतरे
महावीर और महाप्रज्ञ की विरासत को
साथ लिए देखिए महाश्रमण उतरे

सादगी का नूर भी है, ज्ञान का कपूर भी है
अहिंसा का देते हैं पैग़ाम भी महाश्रमण
धर्मसंघ की कमान साधते हैं दिन-रैन
साधना में रहें आठों याम भी महाश्रमण
धर्म की पकड़ डोर, नापें धरती का छोर
घूमें गली-गली गाम-गाम भी महाश्रमण
कहाँ आखरों में बंध पाएंगे ऐसे महान
श्रमण; कि जिनका है नाम भी महाश्रमण

त्याग, तप, साधना से ऐसे हो गए प्रबल
कामना पे लगाते विराम भी महाश्रमण
भीतर से बाहर तलक दिव्यरूप संत
आत्मा भी, हाड़-मांस-चाम भी महाश्रमण
हर क्षण, हर पल, एक सा सलोना रूप
सुब्ह भी महाश्रमण, शाम भी महाश्रमण
जिसने समर्पण के झरोखों से निहारा
उसके लिए तो चारों धाम भी महाश्रमण

✍️ चिराग़ जैन

देश को महान कौन करता

यदि इतिहास वाले लोग हम जैसे होते
बोलो दुविधाओं का निदान कौन करता
झाँसी वाली रानी कर लेती समझौता गर
राष्ट्र के निमित्त बलिदान कौन करता
भगत भी चाटुकारों वाली भाषा सीख लेते
भारतीयता पे अभिमान कौन करता
नेताजी सुभाष औ पटेल होते स्वार्थी तो
फिर मेरे देश को महान कौन करता
✍️ चिराग़ जैन

तिरंगा

अपना तिरंगा एक परचम ही नहीं है
भावनाओं की बहार-सी है तीन रंग में
छोटे-छोटे बालकों के अधरों पे बिखरी जो
वही एक पावन हँसी है तीन रंग में
प्रेम, त्याग, एकता, अखण्डता, समानता से
ओत-प्रोत आत्मा बसी है तीन रंग में
खादी वाले मोटे रेशों का ही ताना-बाना नहीं
भारत की एकता कसी है तीन रंग में

✍️ चिराग़ जैन

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