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व्यस्तता

जब तक तुम संग थीं मैंने नहीं तलाशी कोई ख़ुशी नहीं खोजी कोई मुस्कान नहीं ढूँढ़ी कोई हँसी …ज़रूरत ही नहीं पड़ी। अब तलाशता फिरता हूँ एक-मासूम सी ख़ुशी अपने दिल के लिये। एक कोमल-सी मुस्कान अपने होंठों के लिये। एक गीली-सी हँसी अपने चेहरे के लिये। और एक पावन-सी चमक अपनी...

शॉर्ट-सर्किट

सर्किट के सीने में हुई गड़बड़ का असर उपकरण पर भी समान रूप से पड़ा लेकिन इन दोनों के बीच बेचारा वायर अकारण ही सड़ा। तार बेचारा सदैव अपना कार्य सुचारू रूप से करता है लेकिन जब भी कुछ प्रॉब्लम होती है तो उसको जलना ही पड़ता है। रिश्तों के कनेक्शन में हुए झगड़ों के शॉर्ट-सर्किट...

खोते मंज़र

चाहकर भी नहीं बचा पा रहे हैं हम वह सब जो आनंदित करता है हमें तनाव के क्षणों में। क्षमा नहीं करेंगी हमें हमारी ही सन्तानें क्योंकि छीन लेते हैं हम रोज़ाना आनंद के अनिवार्य तत्व अगली पीढ़ी से …आधुनिक बनने की कोशिश में मिटा देते हैं रोज़ाना प्रकृति में बिखरे काव्यांश...

मापदण्ड

टूट गया था मैं ठीक वैसे ही ज्यों कठोर धरातल पर गिरते ही टूट जाता है कच्चा बर्तन। क्वारी-गर्भवती कन्या के मजबूर बाप की तरह कसमसा उठी थी मेरी आत्मा। जून की झुलसती गर्मी में सड़क-किनारे खड़े शिकंजीवाले की गीली रेहड़ी पर पड़े बर्फ़ के छोटे-से टुकड़े की तरह पिघल गईं थीं मेरी...

अन्तर

अन्तस् की पावन भोगभूमि और मानस की पवित्र भावभूमि पर बसी अधरों की सौम्यता। लोचनयुगल में अनवरत प्रवाहमान विश्वास की पारदर्शी भागीरथी अनायास ही छलक पड़ती है सागरमुक्ता-सी दन्तपंक्ति के पार्श्व से प्रस्फुटित निश्छल खिलखिलाहट के साथ। और इस पल को शब्दों में बांधने के निरर्थक...

दुःख

वाह के मज़मों में अक्सर मौज़ूद होती है आह भी। जैसे बहुत कुछ पा लेने पर भी नहीं मिट पाती है कसक कुछ खो जाने की। दुःख जन्मता है ख़ुशियों की कुक्षि से कदाचित् यही सिद्ध करने के लिये जलती हैं खलिहानों में रखी फ़सलें फटते हैं धरती पर उतरते अंतरिक्ष-यान मरते हैं जवान बेटे...
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