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विविधता

(एक) आलीशान शोरूम के चमचमाते शोकेस में महंगी विग सिर पर लगाये हज़ारों रुपये के लहंगे से सजा इतरा रहा था पुतला। (दो) अंग्रेजी स्टाइल के फास्ट-फूड कॉर्नर में जगमगा रहा था आकर्षक-स्वादिष्ट राजकचौरी से सजा महंगा ख़ूबसूरत काउण्टर …मद्धम नीले प्रकाश के साथ। बोनचाइना के...

मौन

भले ही कभी बाँहों में भरकर दुलारा न हो मुझे आपके नेह ने! …लेकिन फिर भी न जाने क्यों काटने को दौड़ता है आपका मौन! ✍️ चिराग़...

उम्मीद

उम्मीद टूट जाये तो पीड़ा …संत्रास! और बंधी रहे तो टूट जाने की आशंका। ✍️ चिराग़...

मन

कितना भयंकर पल है …मन में कहने को बहुत कुछ है पर कुछ भी कहने का मन नहीं है। ✍️ चिराग़...

वायरस

जब से डाउनलोड की है तुम्हारे नाम की फाइल बार-बार हैंग होता है दिल का सिस्टम …शायद फाइल में वायरस था जिसने सबसे पहले डी-एक्टिवेट किया ब्रेन का एंटी-वायरस और फिर करप्ट कर दिया ऑपरेटिंग सिस्टम ..स्लो कर दी मेमोरी …शायद इंस्टॉल करनी पड़ेगी नई विंडो ✍️ चिराग़...

वक़्त का हिण्डोला

घर के मुख्य द्वार की देहलीज पर बैठकर दफ़्तर से लौटते पापा की राह तकतीं नन्हीं-नन्हीं आँखें रोज़ शाम आशावादी दृष्टिकोण से निहारती थीं सड़क की ओर …कि पापा लेकर आएंगे कुछ न कुछ चिज्जी हमारे लिए। लेकिन लुप्त हो रही है ये स्नेहिल परंपरा पिछले कुछ वर्षों से बच नहीं पाती...
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