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काव्य

जिन शिखरों को हो पिघलने से ऐतराज़ उन्हें कभी नदी-सा बहाव नहीं मिलता अनुभूति अनकही रहती हैं जब तक अक्षरों से उनका स्वभाव नहीं मिलता जोड़-तोड़ करने से कविता तो बनती है किन्तु ऐसी कविता में भाव नहीं मिलता काव्य तो है ऐसी पीड़ाओं की प्रतिध्वनि जहाँ टीस उठती है पर घाव नहीं...

सपना

मुझपे अब मेहरबान हो कोई मेरे सपनों की जान हो कोई मेरे मन में उतर-उतर जाए जैसे बन्सी की तान हो कोई ✍️ चिराग़...

युवा हो गया मीडिया

पिछले दिनों फैशन टीवी पर यह कहकर प्रतिबंध लगाया गया कि उस पर फैशन कार्यक्रमों की आड़ में अश्लीलता परोसी जा रही है। प्रतिबंध लगा और हट भी गया; लेकिन इससे किसी को कोई फ़र्क़ नहीं पड़ा। क्योंकि अब हमारे देश का दर्शक वर्ग उत्तेजक दृश्यों के लिए कुछ गिने-चुने अंग्रेज़ी चैनल्स...

प्यार भर देंगे

तेरे दामन में प्यार भर देंगे तेरे मन में शृंगार भर देंगे कब तलक तू हमें न चाहेगा ख़ुद को तुझ पर निसार कर देंगे ✍️ चिराग़...

प्रेम से भीगा हृदय

लाख अवगुंठन छिपाएँ प्रीत का मुखड़ा कुछ झलक तो आएगी ही आवरण के पार जब हृदय में नेह के बिरवे नए पल्लव संजोएँ और आकर्षण खिले मन में सुवासित गंध लेकर तब नयन की कोर पर आकर ठहरता है निवेदन श्वास जाती है प्रिये के द्वार तक संबंध लेकर भावनाओं का अनूठा-अनलिखा यह गीत है हर इक...

होली

सबके जीवन में भरें पावनता के रंग ऐसी रंगत लाए अब, होरी अपने संग अब ऐसे मनने लगा, होली का त्यौहार चेहरे स्याह-सफेद हैं, रंगे हुए अख़बार भूले से भी मत करो, पॉवर का मिस-यूज़ भस्म हो गई होलिका, उड़ा पाप का फ्यूज़ ✍️ चिराग़...
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