+91 8090904560 chiragblog@gmail.com

देशप्रेम का क्रीम-पाऊडर

‘राजनीति महत्वाकांक्षी मस्तिष्कों का क्रीड़ाक्षेत्र है।’ -यह एक सूक्ति मात्र नहीं बल्कि मतदाताओं की उम्मीदों पर वज्रपात भी है। समाजसेवा और देशप्रेम का क्रीम-पाऊडर लगाकर कोई व्यक्ति जनता को मुँह दिखाने क़ाबिल बनता है। निरंतर ब्यूटी पार्लर भ्रमण करने के फलस्वरूप जनता एक...

सर्दी : एक श्वेतवर्णा बूढ़ी दादी

कँपकँपाते शरीर को सफेद चादर में लपेटे हुए रोज़ सुबह एक बूढ़ी दादी ठंडे-ठंडे हाथों से गाल छूती है। मैं झल्लाकर सिर तक रजाई खींच लेता हूँ। दादी हँसकर रसोई में जाती है और सरसों के साग की ख़ुशबू से मेरे आलस्य में व्यवधान करती है। खेतों में हरी सब्ज़ियों की ताज़गी देखकर बूढ़ी...

अस्तित्व का मापदंड

फेसबुक को अपने अस्तित्व का मापदंड माननेवाले लोगों का रक्तचाप मापने के लिए प्रति पोस्ट लाइक को प्रति पोस्ट शेयर से गुणा किया जाना चाहिए। इस डिजिटल संचार माध्यम ने एक ऐसी भ्रामक सृष्टि की सर्जना कर दी है कि किसी की चार दिन की निष्क्रियता उसके डिजिटल परिवार को ‘चिंतित...

अलविदा 2017

दो हजार सत्रह भी बीता समय अनवरत दौड़ा जाय क्या क्या छूट गया है हमसे आओ देखें नजर घुमाय साल शुरू ही हुआ अभी था उत्सव का माहौल जवान छोड़ गए संगत सितार की अब्दुल हामिद जाफर खान अभी सिसकियों से बाहर भी नहीं आ सका था इक साज मौन हो गई ओमपुरी की दानेदार अलभ आवाज उधर राजनीति की...

ओ विकलता!

ओ विकलता! दो घड़ी मन को अकेला छोड़ दे तू! नींद का तुझसे पुराना वैर है री! श्वास ने लय खोई तेरे साथ चलकर धड़कनों की ताल द्रुत होती अचानक रह गई है शांति अपने हाथ मलकर मान भी जा! एक क्षण भीषण प्रतिज्ञा तोड़ दे तू! दो घड़ी मन को अकेला छोड़ दे तू! अनवरत मस्तिष्क में हलचल मची है...

उत्सव का संयोग

कवि के आँगन में पीड़ा के उत्सव का संयोग हुआ है निश्चित है अब इस ड्योढ़ी पर कोई अनुपम गीत सजेगा आँसू ने पलकें धो दी हैं, मुस्कानों के आमंत्रण पर सपने आँगन पूर रहे हैं, आशा सज आई तोरण पर वीणा के सोए तारों को छूकर निकली है बेचैनी कुछ पल ठहरो इन तारों पर पावनतम संगीत सजेगा...
error: Content is protected !!