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शांति का अवसर

भाग जाने दो कन्हैया युद्ध भू से अर्जुनों को यह पलायन ध्वंस के जयघोष से कितना बड़ा है मत मनाओ यूँ समझ लो शांति का अवसर खड़ा है मोहवश कोई धनंजय कीर्ति को तजने लगे तो छोड़कर गाण्डीव जो हरिनाम ही भजने लगे तो उस समय उस त्याग की अनुगूंज का सम्मान कर लो इस पराभव से बचेगा क्या...

दिल्ली के मुख्यमंत्री के नाम एक खुला पत्र

श्री मान अरविंद केजरीवाल जी मुख्यमंत्री दिल्ली सरकार सरजी! हमें इस बात का भान है कि आप जब से सरकार में आए हैं, तब से पूरी क़ायनात आपके खि़लाफ़ हो गई है। पूरे देश की राजनीति, नौकरशाही और व्यवस्था सिर्फ इसी प्रयास में है कि आपको कुर्सी से कैसे हटाया जाए। स्वयं...

प्रश्न पूछना पाप है

साहब ने शतरंज की चाल चली। चार-पाँच चाल चलने के बाद, साहब हारने लगे। आँख बचाकर शतरंज की टेबल से उठकर, वे लूडो खेलने लगे। देश शतरंज को भूल गया और लूडो देखने लगा। थोड़ी देर बाद लूडो में भी साहब की सारी गोटियाँ पिट गईं। देश साहब की बुद्धिमत्ता पर लगाने के लिए प्रश्नचिन्ह...

सपनों की शोकसभा

समय मिले तो तुम भी आना दो झूठे आँसू टपकाने हमने जो मिलकर देखे थे, उन सपनों की शोकसभा है तुम जिनका तर्पण कर आए जीवन नदिया की धारा में जो आँखों में ठहर गए थे, उन लम्हों की शोकसभा है जिनसे फिल्टर हो जाते थे, कड़वाहट के सब कीटाणु सबसे पहले अपनेपन की दोनों किडनी फेल हुई हैं...

शहर का बयान

सारी जिम्मेदारी मेरी, सब सहना लाचारी मेरी प्राण लुटाकर गाली खाना, बस इतनी सी पारी मेरी फिर भी जब अवसर होगा सब गाँवों का गुणगान करेंगे मैं तो ठहरा शहर मुझे अपनाकर सब अहसान करेंगे जब सुविधा का प्रसव कराने, गाँवो ने इनकार किया था तब मैंने ही आगे बढ़कर ये दुखड़ा स्वीकार...

पीड़ा का अनुमान

जिस बिरवे की हर कोंपल को अपने हाथों से दुलराया उस बिरवे के मुरझाने पर माली पर क्या बीती होगी चहक भरी जिसने जीवन में, तिनका-तिनका नीड़ बनाकर उस चिड़िया के उड़ जाने पर, डाली पर क्या बीती होगी कतरा-कतरा जोड़ा हिम ने, तब नदिया का रूप बना था धरती का सीना छलनी कर इक मीठा जलकूप...
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