+91 8090904560 chiragblog@gmail.com

परोक्ष

किसी का क़द ज़रा उठ जाए तो सब देख लेते हैं किसी का पद ज़रा उठ जाए तो सब देख लेते हैं कहाँ गहराई है किसकी यही सबको नहीं दिखता कोई बरगद ज़रा उठ जाए तो सब देख लेते हैं ✍️ चिराग़...

इक अदद इन्सान

मैंने कब चाहा कि सिर पर ताज होना चाहिए बस मिरे माथे पे माँ का इक दिठोना चाहिए दिल में बेशक़ इक बड़ा अरमां संजोना चाहिए चंद क़तरे ऑंख में पानी भी होना चाहिए घर में ख़ुशियों के लिए कालीन या मखमल नहीं एक छोटा-सा मुहब्बत का बिछोना चाहिए ऑंसुओं की मूक भाषा को समझने के लिए हर...

कोई यूँ ही नहीं चुभता

कोई चीखा है तो उसने बड़ी तड़पन सही होगी कोई यूँ ही नहीं चुभता कहीं टूटन रही होगी किसी को सिर्फ़ पत्थर-दिल समझ कर छोड़ने वालो टटोलो तो सही उस दिल में इक धड़कन रही होगी ✍️ चिराग़...

नमक

यूँ चखा हमने बहुत दुनिया के स्वादों का नमक है ज़माने से अलग माँ की मुरादों का नमक तू परिन्दा है तिरी परवाज़ ना दम तोड़ दे लग गया ग़र शाहज़ादों के लबादों का नमक आँसुओं की शक़्ल ले लेंगी तड़प और सिसकियाँ दिल के छालों पर जो गिर जाएगा यादों का नमक दावतें धोखे की हरगिज़ हो न...

फागुन की शाम

फागुन की शाम कैसी हवा चली हाय राम जोगियों का दिल धक-धक करने लगा सारी सोच बूझ घास-फूस सी बिखर गई मन को खुमार चकमक करने लगा पीपल का पेड़ सारे पंछियों के संग मिल झूम-झूम मार बक-बक करने लगा और चुपचाप मेरा मानस भी हौले-हौले प्रेम के मृदंग पे धमक करने लगा ✍️ चिराग़...

तुझको कुछ भी याद नहीं?

तेरी पलकों में सपनों की दुनिया अब आबाद नहीं मेरी यादें तेरे दिल तक पहुँचाती आवाज़ नहीं तुझको कुछ भी याद नहीं? तू मुझको रजनीबाला का मूर्तरूप सी लगती थी बातें तेरी, मुझे पौह की मधुर धूप सी लगती थी तेरा यौवन मुझे पंत की सोनजुही में दीखा था तूने मेरी यादों में रातों को...
error: Content is protected !!