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आवरण से आचरण तक

आवरण मात्र हैं वस्त्र आचरण नहीं! क्योंकि राम वैभव में भी राम ही रहे और वन में भी राम ही रहे लेकिन रावण वल्कल पहन कर भी नहीं हो सका साधु! ✍️ चिराग़...

उतरना

मैंने नाव से सीखा है कि तरने की प्रक्रिया प्रारंभ होती है उतरने से! ✍️ चिराग़ जैन

प्रवृत्ति

मिट्टी में क्षमता होती बीज की प्रवृत्ति बदलने की तो एक ही गुरुकुल में एक ही गुरु से पढ़कर सभी शिष्य युधिष्ठिर बन जातेे कोई दुर्योधन न बना होता ✍️ चिराग़...

सोना लई जा रे, चांदी दई जा रे

लो जी, बाज़ार में भी स्त्रीलिंग चांदी ने पुल्लिंग सोने की मोनोपॉली पर धावा बोल दिया है। अब खरे सोने की सामने टंच चांदी अकड़ कर चलने लगी है। मैं तो उस दिन का इंतज़ार कर रहा हूँ जब भतीजे के ब्याह से विदा होते समय बुआजी, मुँह बिचकाते हुए कहेंगी- ‘भाभी ने सोने के कंगन में...
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