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मेहंदी

सावन की हरियाली उतर आई है हथेलियों पर …महकने लगा है भाग्य! ✍️ चिराग़ जैन

वर्तमान गवाह है…

जिन्होंने यह कहना शुरू किया कि इस्लाम ख़तरे में है, उन्हीं के नुमाइंदों ने अफगानिस्तान पर जबरन कब्ज़ा कर लिया। यूएनओ में स्थायी सदस्यता की डींगें हाँकनेवाले देशों के लिए यह शर्मिंदगी भरी लानत है। सबसे उम्दा हथियार बनानेवाले देशों के लिए यह डूब मरने की बात है।...

देशभक्ति

कैसे इस पर न्यौछावर हो अपना ख़ून-पसीना सीखें वक़्त पड़े तो फौलादी साबित हो हर इक सीना, सीखें शीश कटे तो उसका, जिसने भारत-भू पर आँख उठाई हम इस पर मरना क्यों चाहें, इसकी ख़ातिर जीना सीखें ✍️ चिराग़...

हिंदुस्तान बोलेगा

अगर इंसान बनकर आए तो इंसान बोलेगा ज़ुबां मिसरी सरीखी मीर का दीवान बोलेगा अगर हैवानियत लेकर इधर आए तो फिर सुन लो शिवाजी की ज़ुबां में सारा हिंदुस्तान बोलेगा ✍️ चिराग़...

प्रतिशोध का दंश

प्रतिशोध एक अंतहीन प्रक्रिया है। जाति, धर्म, सम्प्रदाय, खानदान, राजनीति, विचारधारा, देश, समाज… इन सबका सौंदर्य और सुख प्रतिशोध की इस महाज्वाला में भस्म हुआ जाता है। देवासुर संग्राम से लेकर रामायण, महाभारत और चाणक्य ही नहीं, वरन प्रत्येक संस्कृति और समाज के पास...
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