Chirag Jain Writings, Doha, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Poetry
शादी का जोड़ा चढ़ा, सजे सोलहों साज
इक छोटी-सी लाडली, बड़ी हुई है आज
विदा समय बाबुल कहे, जोड़े दोनों हाथ
मेरी लाज बंधी हुई, बिटिया तेरे साथ
बिन कारण ताने सहे, बिन मतलब संत्रास
पर उसने तोड़ा नहीं, बाबुल का विश्वास
बाबुल तेरी देहरी, जब से छूटी हाय।
तब से मन की बात बस, मन ही में रह जाय
दो नावों में ही रहें, बिटिया के दो पाँव
ना ये अपना घर हुआ, ना वो अपना गाँव
सहना, घुलना, सिसकना, सुनना बात तमाम
बिटिया के ससुराल में, कितने सारे काम
अब तू करना सीख ले, सब के संग निबाह
माँ ऑंखें भर-भर कहे, भरियो नहीं कराह
चिड़िया जब दुलहिन बनी, पेड़ हुआ कंगाल
सूनी-सूनी सी लगे, झूले बिन हर डाल
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Doha, Poetry, Unpublished
घन, पंछी, बरखा करें, गर्जन, कलरव, सोर
हृदय मयूरा झूमिहै, ज्यों सावन में मोर
जब मेघन का नेह जल, बरसत है चहुँ ओर
इस प्रेमी मन भीगता, उत बिरहन की कोर
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Ghanakshari, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Poetry
अपना तिरंगा एक परचम ही नहीं है
भावनाओं की बहार-सी है तीन रंग में
छोटे-छोटे बालकों के अधरों पे बिखरी जो
वही एक पावन हँसी है तीन रंग में
प्रेम, त्याग, एकता, अखण्डता, समानता से
ओत-प्रोत आत्मा बसी है तीन रंग में
खादी वाले मोटे रेशों का ही ताना-बाना नहीं
भारत की एकता कसी है तीन रंग में
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Ghanakshari, Poetry, Unpublished
दुनिया में आ के सकुचाई पल भर फिर
ममता की छाँव में सँवर गई ज़िन्दगी
पालना, खिलौना, पाठशाला, अनुभव, ज्ञान
प्रेम की छुअन से निखर गई ज़िन्दगी
क़ामयाबी का गुमान ज़िन्दगी पे लदा और
ज़िन्दगी के दाता को अखर गई ज़िन्दगी
मौत की हवा ने श्वास का दीया बुझा दिया तो
हाड़-हाड़ राख में बिखर गई ज़िन्दगी
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Free Verse, Mann To Gomukh Hai, Poetry
मौरिस नगर के नुक्कड़ों को
आज भी याद हैं
हज़ारों निशब्द प्रेम कहानियाँ
जिनका पूरा सफ़र
तय होकर रह गया
आँखों-आँखों में ही।
लेकिन अब
ये प्रेम कहानियाँ
ऐसी ख़ामोशी से नहीं बनतीं।
अब
दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ लिखकर
अपने अधिकार जान गया है प्रेम।
अब लोक-लाज
और पिछड़े हुए समाज से
आगे निकलकर
‘निरुलाज़’ और ‘मॅक-डीज़’ में
बर्गर खाते हुए
घंटों बतिया सकता है प्रेम
…सेफ्ली।
या फिर आट्र्स फैकल्टी के बाहर
भेल-पुड़ी खाते हुए
आलिंगनबद्ध हो सकता है
सारे ज़माने के सामने।
अब फैशनेबल मोटर बाइक पर
बेहिचक-बेझिझक
बिना किसी से डरे
फर्राटे से दौड़ सकता है प्रेम।
पहले की तरह नहीं
कि नाम पूछने में ही
महीनों लग जाएँ।
अब तो झट से पूछ सकता है
कोई भी
कुछ भी
किसी से भी।
✍️ चिराग़ जैन