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बँटवारा

जब से आंगन में हुए, दीवारों के ठाठ तब से महंगे हो गए, छोटे-छोटे बाट ✍️ चिराग़ जैन

रिश्तों को ज़िंदा रखना

कितना आसान है रिश्तों को फ़ना कर देना ज़रा-सी बात को दिल से लगा के रख लेना ग़ैर लोगों को, रक़ीबों को तवज़्ज़ो देना शक़ की तलवार से विश्वास को कर देना हलाल अपने लहजे को तल्ख़ियों के हवाले करना अपने मनसूबों में कर लेना सियासत को शुमार सामने वाले की हर बात ग़लत ठहराना उस की हर एक...

ख़ुद से मुख़ातिब

कितना आसान है दुनिया को ग़लत ठहराना थोड़ा चालाक रवैया ज़रा-सी अय्यारी झूठ को सच बना देने का क़रामाती गुर थोड़ी कज़बहसी थोड़ी ज़िद्द ज़रा-सी लफ़्फ़ाज़ी तेज़ आवाज़ औ’ मुद्दों को घुमाने का हुनर चन्द सिक्कों से ख़रीदे हुए दो-चार गवाह और इक इन्तहा बेअदबी की ढिठाई की…. ….कितना...

अंतर्मुखी

ख़ुशी की लाश उठती है ख़ुशी की चाह के नीचे बहुत से ज़ख्म होते हैं ज़रा-सी आह के नीचे हमारे दिल की बातें दिल में ऐसे दब के रहती हैं कि जैसे पीर सोता हो कोई दरगाह के नीचे ✍️ चिराग़...

चांदनी से रात बतियाने सहेली आ गयी

चांदनी से रात बतियाने सहेली आ गयी कुछ मुंडेरों के मुक़द्दर में चमेली आ गयी पैर भी सुस्ता लिये, आँखों ने भी दम ले लिया ज़िंदगी की राह में, दिल की हवेली आ गई झाँकता है हर कोई ऐसे दिल-ए-नाशाद में जैसे आंगन में कोई दुल्हन नवेली आ गई बोझ कंधों का उतर कर गिर गया जाने कहाँ जब...
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