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प्रेम-तीर्थ

मुम्बई में जुहू-चौपाटी पे शाम सात बजे बाद; परिवार संग नहीं जाना चाहिए आगरे में बालकों को ताज और प्रेमिका को पालिवाल गार्डन में घुमाना चाहिए बैंगलोर वाले लाल बाग़ जैसा कोई एक प्रेमियों को देश भर में ठिकाना चाहिए जहाँ पहले हैं, वहाँ और सुविधाएँ मिलें जहाँ पे नहीं हैं...

चांद का किरदार

एक पल सूरज छिपा और फिर उजाला हो गया लेकिन इसमें चांद का किरदार काला हो गया साज़िशें सूरज निगलने की रची थीं चांद ने पर वो अपनी साज़िशों का ख़ुद निवाला हो गया ✍️ चिराग़...

वो शालीन पल

हाँ, गुज़ारे थे कभी दो-तीन पल कुछ हसीं, कुछ शोख़, कुछ रंगीन पल हर तरह की वासना से हीन पल अब कहाँ मिलते हैं वो शालीन पल भोग, लिप्सा, मोह के संगीन पल कब किसे दे पाए हैं तस्कीन पल आपका आना, ठहरना, लौटना इक मुक़म्मल हादसा थे तीन पल साथ हो तुम तो मुझे लगता है ज्यों हो गए हैं...

सितारों की तरह

हो गई है ज़िन्दगी अपनी सितारों की तरह देखते हैं लोग भी अब तो नज़ारों की तरह जो चले थे काम करने कामगारों की तरह वो उनींदे से खड़े हैं अब कतारों की तरह सब शिकारी की तरह घर से निकलते हैं मगर सब फँसे मिलते शिकंजे में शिकारों की तरह आपके हालात की बेइंतहा मज़बूरियाँ और मेरे...

आसरा

लड़खड़ाकर गिरे नहीं होते गर तेरे आसरे नहीं होते कमनसीबी का दौर है वरना हम भी इतने बुरे नहीं होते ✍️ चिराग़...
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