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दर्द की दास्तान

दर्द की दास्तान सुन लेना ख़ुद-ब-ख़ुद साहिबान सुन लेना होंठ मेरे न कुछ कहेंगे मगर आँसुओं का बयान सुन लेना ✍️ चिराग़...

अहसास

तुम छोड़ जाओगे- ये अहसास खल रहा है सीने में दर्द का इक लावा पिघल रहा है कुछ इस तरह से हर इक लम्हा निकल रहा है हाथों से जैसे कोई रेशम फिसल रहा है ✍️ चिराग़...

परिवर्तन

जब से हम करने लगे बात-बात में जंग तब से फीके पड़ गए त्यौहारों के रंग धुआँ-धुआँ सा रह गया दीपों का त्यौहार शोर-शराबा बन गया होली का हुड़दंग ✍️ चिराग़...

पुल बनाओ तो सही

पुल बनाओ तो सही इस फ़ासले के सामने मुश्क़िलें ख़ुद हल बनेंगीं मसअले के सामने आंधियाँ राहों में बिछ जाएंगीं सजदे के लिए आसमां छोटा पड़ेगा हौसले के सामने जब जवानी चल पड़ेगी बांधकर सर पर क़फ़न कौन फिर आएगा उसके फ़ैसले के सामने हिम्मतों ने ताक पर रखे ज़माने के उसूल ताश के घर कब...

गुमान के असर से बचा

चलो किसी तरह मैं मुश्क़िले-सफ़र से बचा ख़ुदा मुझे तू अब गुमान के असर से बचा इन आइनों के सामने से ज़रा बच के निकल तू अपने आप को ख़ुद अपनी भी नज़र से बचा अगर इस आग को बढ़ने से रोकना चाहे तो अपने मुल्क़ को इस आग की ख़बर से बचा ये दुनिया हर किसी पे उंगलियाँ उठाती है तू अपनी सोच को...
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