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गीत लिखते वक़्त

इक दफ़ा पलकों को अश्क़ों में भिगो लेते हैं हम और फिर अधरों पे इक मुस्कान बो लेते हैं हम गीत गाते वक्त रुंध ना जाए स्वर इसके लिए गीत लिखते वक्त ही जी भर के रो लेते हैं हम ✍️ चिराग़...

याद

कभी जब नीम की डाली पे चिड़ियाँ चहचहाती हैं हज़ारों ख्वाहिशें दिल में तड़पकर कुलबुलाती हैं मेरे आगे से जब भी ख़ुशनुमा मंज़र गुज़रते हैं किसी की याद में भरकर ये आँखें छलछलाती हैं ✍️ चिराग़...

क़हक़हे

बिल्कुल ख़ाली कर दिया है मैंने दिल का भरा-पूरा मकान आँखों की बाल्टी में आँसुओं का पानी भरकर धो डाला है मकान का एक-एक कोना …काफ़ी दिन हुए। लेकिन अब भी गूंजते हैं यादों के क़हक़हे टकराकर ख़ाली मकान की ख़ामोश दीवारों से। और मैं फिर से धोने लगता हूँ दिल के मकान की उदास...

जीवन दर्शन

मुझे गुलमोहरों के संग झरना आ गया होता किसी छोटे से तिनके पर उबरना आ गया होता तो मरते वक़्त मेरी आंख में आँसू नहीं होते कि जीना आ गया होता तो मरना आ गया होता ✍️ चिराग़...

माँ

माँ मैं तुझको क्या लिखूँ, सब तुझसे साकार जब-जब तू आशीष दे, तब-तब हो त्योहार ✍️ चिराग़ जैन
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