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मुक़म्मल क़लाम

सभी ग़मों को ग़ज़ल का मुकाम देता है ख़ुदा सभी को कहाँ ये इनाम देता है वो जिसकी एक-एक साँस जैसे मिसरा हो वही जहाँ को मुक़म्मल क़लाम देता है ✍️ चिराग़...

ज़रूरत

मेरी बेबस मुहब्बत को सहारों की ज़रूरत है दीवाने को महज तेरे इशारों की ज़रूरत है मेरा दिल क़ैद करने को तेरी ज़ुल्फ़ें ही काफी हैं न तीरों की ज़रूरत है न तारों की ज़रूरत है ✍️ चिराग़...
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