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पाप

सिर्फ़ मतलब के लिए हर चाल चलना पाप है हर दफ़ा दर देखकर मजहब बदलना पाप है शाइरी, दीवानगी, नेकी, इबादत, मयक़शी और राहे-इश्क़ में गिर कर संभलना पाप है काश बच्चों की तरह हालात भी ये जान लें ख़्वाहिशों की तितलियों के पर मसलना पाप है दौर इक ऐसा भी था, जब झूठ कहना मौत था और अब...

चांदनी से रात बतियाने सहेली आ गयी

चांदनी से रात बतियाने सहेली आ गयी कुछ मुंडेरों के मुक़द्दर में चमेली आ गयी पैर भी सुस्ता लिये, आँखों ने भी दम ले लिया ज़िंदगी की राह में, दिल की हवेली आ गई झाँकता है हर कोई ऐसे दिल-ए-नाशाद में जैसे आंगन में कोई दुल्हन नवेली आ गई बोझ कंधों का उतर कर गिर गया जाने कहाँ जब...

ऐब्स्ट्रेक्ट

किसी की याद के कुछ रंग यक-ब-यक बिखर जाते हैं ज़ेहन के कॅनवास पर। और मैं ठहर कर निहारने लगता हूँ उस कलाकृति की ख़ूबसूरती को। बूझने लगता हूँ अतीत के स्ट्रोक्स की जटिल पहेलियाँ। आज तक समझ नहीं पाया हूँ कि ये ऐब्स्ट्रेक्ट बना तो बना कैसे? ✍️ चिराग़...

सच के नाम पे

दुनिया की बदसलूक़ी का तोहफ़ा लिये जिया फिर भी मैं अपने सच का असासा लिये जिया कोई महज ईमान का जज्बा लिये जिया कोई फ़रेब-ओ-झूठ का मलबा लिये जिया टूटन, घुटन, ग़ुबार, अदावत, सफ़ाइयाँ इक शख़्स सच के नाम पे क्या-क्या लिये जिया जब तक मुझे ग़ुनाह का मौक़ा न था नसीब तब तक मैं बेग़ुनाही...

सपना

मुझपे अब मेहरबान हो कोई मेरे सपनों की जान हो कोई मेरे मन में उतर-उतर जाए जैसे बन्सी की तान हो कोई ✍️ चिराग़...
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