+91 8090904560 chiragblog@gmail.com

वो शालीन पल

हाँ, गुज़ारे थे कभी दो-तीन पल कुछ हसीं, कुछ शोख़, कुछ रंगीन पल हर तरह की वासना से हीन पल अब कहाँ मिलते हैं वो शालीन पल भोग, लिप्सा, मोह के संगीन पल कब किसे दे पाए हैं तस्कीन पल आपका आना, ठहरना, लौटना इक मुक़म्मल हादसा थे तीन पल साथ हो तुम तो मुझे लगता है ज्यों हो गए हैं...

दर्द की दास्तान

दर्द की दास्तान सुन लेना ख़ुद-ब-ख़ुद साहिबान सुन लेना होंठ मेरे न कुछ कहेंगे मगर आँसुओं का बयान सुन लेना ✍️ चिराग़...

अहसास

तुम छोड़ जाओगे- ये अहसास खल रहा है सीने में दर्द का इक लावा पिघल रहा है कुछ इस तरह से हर इक लम्हा निकल रहा है हाथों से जैसे कोई रेशम फिसल रहा है ✍️ चिराग़...

गुमान के असर से बचा

चलो किसी तरह मैं मुश्क़िले-सफ़र से बचा ख़ुदा मुझे तू अब गुमान के असर से बचा इन आइनों के सामने से ज़रा बच के निकल तू अपने आप को ख़ुद अपनी भी नज़र से बचा अगर इस आग को बढ़ने से रोकना चाहे तो अपने मुल्क़ को इस आग की ख़बर से बचा ये दुनिया हर किसी पे उंगलियाँ उठाती है तू अपनी सोच को...

संतोष

सिर्फ़ मकरन्द बन के जी लेंगे हम तेरी गन्ध बन के जी लेंगे ज़िन्दगी चाक़ हो गई तो क्या हम भी पैबन्द बन के जी लेंगे ✍️ चिराग़...
error: Content is protected !!