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राम मंदिर का मुहूर्त

रामजी ने जिस मुहूर्त में कोई शुभकार्य किया, ग्रहों के उसी संयोग को हम शुभ मुहूर्त मानते थे। आज राजनीति ने हमें इस कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है कि रामजी के मंदिर के लिए शुभ मुहूर्त का टंटा पड़ रहा है।
अरे, उनका नाम लेकर तो जिस मुहूर्त में ईंट रख दो, वही शुभ है मूढ़ो! भूल गए क्या, उनके नाम से तो पत्थर तिर गए थे! पर उस समय राम जी के सब कारज इसलिए सिद्ध हो जाते थे, क्योंकि तब नल-नील की पूरी ऊर्जा पुल बनाने में केंद्रित थी, यदि वे भी राजनीति कर रहे होते तो चार सीटें फालतू मिलने पर रावण के हाथों बिक जाते और राम जी के आगे नाटक करते रहते कि ‘पुल वहीं बनाएंगे’!

✍️ चिराग़ जैन

मैं अयोध्या हूँ।

मैं अयोध्या हूँ।
मेरे स्वभाव में किसी परिस्थिति का सही अंत न तो केवल कौरवों के जीत है, न ही केवल पाण्डवों की जीत। मैंने राम को ख़ुशी-ख़ुशी वन जाते देखा है, मैंने देखा है कि जब राम वन से लौट कर आए तो भरत के मन में राज्य छिनने की पीड़ा नहीं थी, अपितु भाई के लौट आने का हर्ष था।
आज फिर सरयू के घाट पलकें बिछाए एक फैसले की राह देख रहे हैं। इस फैसले के बाद अगर राम और रहमान दोनों के घर घी के दीपक जगमगा गए तो यह राम के अस्तित्व की सबसे बड़ी गवाही होगी। लेकिन इस फ़ैसले से यदि एक भी मन खिन्न हुआ तो मैं अपने राम को बता दूंगी कि राम, तुम फिर से वन चले जाओ, क्योंकि नगरवासी कुरुक्षेत्र की ओर अग्रसर हो रहे हैं।

✍️ चिराग़ जैन

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