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क़लाम साहब नहीं बिके

मन दुखी है
मेरा ही नहीं… सबका
आज सिर्फ़ क़लाम साहब ही
सुपुर्द-ए-ख़ाक़ नहीं हुए
उनके साथ ही दफ़्न हो गई
ये उम्मीद भी
कि इस देश का मीडिया
कभी ज़िम्मेदार होगा
इस देश का मीडिया
कभी संवेदनशील होगा
इस देश का मीडिया
कभी इस देश का होगा।

मीडिया ने बोला नहीं
पर साफ़-साफ़ बता दिया
याक़ूब ज़्यादा बिकाऊ था…
अच्छा ही हुआ
हमारे क़लाम साहब
नहीं बिके
आख़िरी दिन भी।

✍️ चिराग़ जैन

अद्भुत थे प्राण।

अपने हर चरित्र में जो मनोवैज्ञानिक इंजीनियरिंग की वो कमाल थी। चाचा चौधरी का दिमाग़ बड़ा बनाया और होंठ मूछ में छुपा दिए। साबू का शरीर बड़ा बनाया। पिंकी, बिल्लू, चाची इन सबके आकार में एक प्रकार था। साबू जैसे चरित्र की कल्पना कार्टून जगत् में एलियन का प्रादुर्भाव था। संभवतः यह चरित्र भारतीय बच्चों का एलियंस से पहला परिचय है।
कैरिकेचर की दुनिया में वे एक नयी धारा के संयोजक थे। काल्पनिक चरित्रों को उन्होंने सूरत दी, पहचान दी। और खुद की पहचान को केवल एक साधारण से हस्ताक्षर तक सीमित करलिया।
बचपन के कनवास पर कौतूहल मिश्रित हास्य के बीज बोने वाले प्राण महान थे।
विनम्र श्रद्धांजलि

✍️ चिराग़ जैन

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