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जो है वही कहना

किसी भी चोट को सहना बड़ा दुश्वार होता है जु़बां हो और चुप रहना बड़ा दुश्वार होता है ये माना दर्द को अभिव्यक्त करना भी ज़रूरी है मगर जो है वही कहना बड़ा दुश्वार होता है ✍️ चिराग़...

कल की छोड़ो, कल का क्या है

ऐसा मत सोचो कि जब सब सोचेंगे तब सोचेंगे पहले हम सोचेंगे तब ही तो इक दिन सब सोचेंगे आख़िर बंदूकों से ही जब सारे काम निकलने हैं आयत रटने से क्या हासिल अहले-मक़तब सोचेंगे दो और दो को पाँच बनाने की तरक़ीबें क्या होंगीं इस उलझन का हल कुर्सी पर बैठे साहब सोचेंगे आज जिन्हें...

दुःख

वाह के मज़मों में अक्सर मौज़ूद होती है आह भी। जैसे बहुत कुछ पा लेने पर भी नहीं मिट पाती है कसक कुछ खो जाने की। दुःख जन्मता है ख़ुशियों की कुक्षि से कदाचित् यही सिद्ध करने के लिये जलती हैं खलिहानों में रखी फ़सलें फटते हैं धरती पर उतरते अंतरिक्ष-यान मरते हैं जवान बेटे...

आदमीयत का अंदाज़ा

हम मुहब्बत का अंदाज़ा करेंगे वो हिमाक़त का अंदाज़ा करेंगे जब तलक दूरियाँ न हों शामिल कैसे चाहत का अंदाज़ा करेंगे आदमी को समझ न पाए जो क्या वो क़ुदरत का अंदाज़ा करेंगे दौरे-ग़म में कहे कोई कुछ भी सब नसीहत का अंदाज़ा करेंगे आदमी ज़िब्ह करने वाले ही आदमीयत का अंदाज़ा करेंगे ख़ुद ही...

कवि

एक जन्म की साधना या तपस्या कुछ रातों की व्यक्ति को नहीं बनाती है कवि। कविता के रूप में शब्दों को संजाने के लिये करनी पड़ती है तपस्या जन्मों तक तब कहीं जाकर कठिनाई से जन्मता है कवित्व। जानते हो? कवि के सामने रखी दवात में नहीं होती है स्याही ख़ून होता है। वही ख़ून जो जलता...
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