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अर्थ बदल के देख

सूरज जैसा जल के देख सोच में मेरी ढल के देख मुझसे तेज़ निकल के देख अपनी सोच बदल के देख हाला तेरे अंतस् की यहाँ-वहाँ न छलके देख अगुआई क्या होती है मेरे आगे चल के देख फिर से तेरी बात चली फिर से आँसू ढलके देख राम लिखा और तैर गए पत्थर होकर हल्के देख पायल मौन चली आई होंठ...

सुरों की आह

ज़माने ने सुरों की आह को झनकार माना है कहीं संवेदना जीती तो उसको हार माना है बड़े बईमान मानी तय किए हैं भावनाओं के जहाँ दो दिल तड़पते हों उसी को प्यार माना है ✍️ चिराग़...

सब कुछ तेरे पास है

अपने भीतर झाँक ले, अपना हृदय टटोल सब कुछ तेरे पास है, अपनी आँखें खोल ✍️ चिराग़ जैन

आदमी मायूस होता है

हवस की राह चलकर आदमी मायूस होता है सदा आपे से बाहर आदमी मायूस होता है कभी मायूस होकर आदमी खोता है उम्मीदें कभी उम्मीद खोकर आदमी मायूस होता है न हो उम्मीद तो मायूसियाँ छू भी नहीं सकतीं हमेशा आरज़ू कर आदमी मायूस होता है हज़ारों ख्वाब बेशक़ बन्द ऑंखों में पलें लेकिन पलक...

उम्मीद

उम्मीद टूट जाये तो पीड़ा …संत्रास! और बंधी रहे तो टूट जाने की आशंका। ✍️ चिराग़...
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