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इक अदद इन्सान

मैंने कब चाहा कि सिर पर ताज होना चाहिए बस मिरे माथे पे माँ का इक दिठोना चाहिए दिल में बेशक़ इक बड़ा अरमां संजोना चाहिए चंद क़तरे ऑंख में पानी भी होना चाहिए घर में ख़ुशियों के लिए कालीन या मखमल नहीं एक छोटा-सा मुहब्बत का बिछोना चाहिए ऑंसुओं की मूक भाषा को समझने के लिए हर...

कोई यूँ ही नहीं चुभता

कोई चीखा है तो उसने बड़ी तड़पन सही होगी कोई यूँ ही नहीं चुभता कहीं टूटन रही होगी किसी को सिर्फ़ पत्थर-दिल समझ कर छोड़ने वालो टटोलो तो सही उस दिल में इक धड़कन रही होगी ✍️ चिराग़...

नमक

यूँ चखा हमने बहुत दुनिया के स्वादों का नमक है ज़माने से अलग माँ की मुरादों का नमक तू परिन्दा है तिरी परवाज़ ना दम तोड़ दे लग गया ग़र शाहज़ादों के लबादों का नमक आँसुओं की शक़्ल ले लेंगी तड़प और सिसकियाँ दिल के छालों पर जो गिर जाएगा यादों का नमक दावतें धोखे की हरगिज़ हो न...

मुहब्बत हार जाती है

दिलों में पल रही चाहत सदा बेकार जाती है भला सोहनी कहाँ कच्चे घड़े पर पार जाती है वो लैला का फ़साना हो या फिर मेरी कहानी हो मुक़द्दर जीत जाता है, मुहब्बत हार जाती है ✍️ चिराग़...

गुलशन

मैंने गुलशन को कई बार सँवरते देखा हर तरफ़ रंग का ख़ुश्बू का समा होता है पंछियों की चहक सरगम का मज़ा देती है चांदनी टूट के गुलशन में उतर आती है धूप पत्तों को उजालों से सजा देती है कोई अल्हड़, कोई मदमस्त हवा का झोंका शोख़ कलियों का बदन छू के निकल जाता है इस शरारत से भी...
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