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प्रेम : पावनता का द्वार

एक पहर ठहरी सखी, कान्हा जी के ठौर। पहुँची कोई और थी, लौटी कोई और।। योगेश छिब्बर जी का यह दोहा भारत में प्रेम के उत्कर्ष को समझने के लिये पर्याप्त हैं। भारत में प्रेम का चरम यह है कि मीरा ने जो प्रेमगीत रचे, वे भक्ति की मानक कविताएँ बनकर जग में प्रसिद्ध हुए। यह भारतीय...

प्यार समझना मुश्किल क्यों है

इस दुनिया में प्यार रहे तो भावों का सत्कार रहे तो कितना प्यारा होगा ये संसार समझना मुश्किल क्यों है प्यार समूचे जीवन का है सार; समझना मुश्किल क्यों है किस्सा सुनकर मन सबका कहता है इसमें भूल हुई है बिन मतलब की दुनियादारी पाँखुरियों में शूल हुई है जो रांझे के साथ हुई थी...

जिस दिन साँस पराई होगी

देह बचेगी स्पर्श न होगा आँखें होंगीं दर्श न होगा सब अपनों के आने का भी मुझको किंचित हर्ष न होगा उस दिन अधरों पर भी कोई याद नहीं मुस्काई होगी जिस दिन साँस पराई होगी जिन होंठों की मुस्कानों से मुझको प्राण मिला करते हैं जिन चेहरों के खिल जाने पर मन के तार हिला करते हैं...

हर सम्भव के साधन हैं

सपनों की आँखें पथराईं हिम्मत की पाँखें कुम्हलाईं संघर्षों की तेज पवन ने प्राणों की शाखें दहलाईं इन सारे झंझावातों से लोहा लिया ज़मीर ने अमृत सोख लिया रावण का राघव के इक तीर ने राजतिलक की शुभ वेला में राघव को वनवास मिला स्वर्ण जड़ित आभूषण उतरे, जंगल का संत्रास मिला...

समय का बारदाना

जब समय फंदा कसेगा भूमि में पहिया धँसेगा शाप सब पिछले डसेंगे पार्थ नैतिकता तजेंगे उस घड़ी तक जूझने का भ्रम निभाना है सब समय का बारदाना है नीतियों का ढोंग करतीं, सब सभाएँ मौन होंगी न्याय की बातें बनातीं मन्त्रणाएँ मौन होंगी जब प्रणय को भूलकर राघव निरे राजा बनेंगे तब सिया...
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