Chirag Jain Writings, Free Verse, Poetry, Unpublished
वाह वाह!
नाम ही दशरथ था
काम तो
शतरथ वाला किया।
जुनून; लगन; मेहनत; सनक; दीवानगी
…इन सबसे आगे का शब्द खोज
बे शब्दकोश!
हुए होंगे कहीं पत्थर
जिनको तराशता था आदमी
मैंने तो आज
पत्थरों को
इक आदमी तराशते देखा।
सचमुच यार
सितार की झंकार
और बंसी की तान पर
थिरकती मुहब्बत से
ज़्यादा महँगी लगी
छैनी-हथौड़े की टंकार पर
उकरती मुहब्बत!
-✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Ghanakshari, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Poetry
गुदड़ी के लाल ने दिखाया था कमाल देखो,
सारी दुविधाओं का निदान ले के आया था
परेशानी, दुख और ग़रीबी में जो जन्मा था,
वही भारती का स्वाभिमान ले के आया था
भारत की खोई आन-बान ले के आया; औ
लोकतन्त्र वाला यश-गान ले के आया था
भारती का एक अलबेला अनमोल पूत,
भारत के लिए संविधान ले के आया था
✍️ चिराग़ जैन