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मुहब्बत सबको होती है

बहुत ज़्यादा न हो पर कुछ तो हसरत सबको होती है जहाँ में नाम और शोहरत की चाहत सबको होती है मरासिम हर दफ़ा ताज़िन्दगी निभता नहीं लेकिन किसी से इक दफ़ा सच्ची मुहब्बत सबको होती है मन अपने आप से भी इक ना इक दिन ऊब जाता है किसी अपने की दुनिया में ज़रूरत सबको होती है हर इक मुज़रिम...

रात से रिश्वत ली है

जीत ने मात से रिश्वत ली है दिल ने जज़्बात से रिश्वत ली है चांदनी कम है अंधेरा ज़्यादा चांद ने रात से रिश्वत ली है फिर से बारिश में चुएगा छप्पर इसने बरसात से रिश्वत ली है सब समय की दुहाई देते हैं सबने हालात से रिश्वत ली है मुझको लगता है मिरी नींदों नें कुछ ख़यालात से...

चांदनी से रात बतियाने सहेली आ गयी

चांदनी से रात बतियाने सहेली आ गयी कुछ मुंडेरों के मुक़द्दर में चमेली आ गयी पैर भी सुस्ता लिये, आँखों ने भी दम ले लिया ज़िंदगी की राह में, दिल की हवेली आ गई झाँकता है हर कोई ऐसे दिल-ए-नाशाद में जैसे आंगन में कोई दुल्हन नवेली आ गई बोझ कंधों का उतर कर गिर गया जाने कहाँ जब...

सावन

घन, पंछी, बरखा करें, गर्जन, कलरव, सोर हृदय मयूरा झूमिहै, ज्यों सावन में मोर जब मेघन का नेह जल, बरसत है चहुँ ओर इस प्रेमी मन भीगता, उत बिरहन की कोर ✍️ चिराग़...

वसंत (दो चित्र)

परेशानियों में यदि उलझा हो अंतस् तो कैसा लगता है ये वसंत मत पूछिये एक-एक दिन एक युग लगता है; और कैसे होता है युगों का अंत मत पूछिये प्रेमगीत शोर लगते हैं और लिपियों के चुभते हैं कितने हलन्त मत पूछिये जल विच कमल सरीख़ा लगता है मन काहे बनता है कोई सन्त मत पूछिये धरती के...
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