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इमरान खान के प्रधानमंत्री बनने पर

पाक की सियासत क़माल की सियासत है
सबकी बनाती है ये रेल, चले जाओगे
फाँसी, गोली, क़ैद, सज़ा यही मिलता है बस
निकलेगा आपका भी तेल चले जाओगे
खेल-खिलवाड़ नहीं ज़िन्दगी का दांव है ये
कस ली है नाक में नकेल चले जाओगे
कुछ रोज़ महलों का रंग ढंग देख लो जी
बाद में तो आप ख़ुद जेल चले जाओगे

भारत के वीर सैनिकों से सामना है अब
साज़िशें करीं तो नींबू से निचुड़ जाओगे
ज़्यादा फूल कर कोई भूल मत कर देना
इन्हें क्रोध आया तो वहीं सिकुड़ जाओगे
सैनिकों के साथ यदि मैच खेलने लगे तो
एक झटके में सबसे बिछुड़ जाओगे
बॉल छोड़ दी तो पाकिस्तान में धमाका होगा
बल्ले पे जो ली तो ख़ुद आप उड़ जाओगे

भारत से भूल के मुकाबला न कीजियेगा
आपके पीएम को दबोच लेंगे मोदी जी
आप जब तक शुरुआत भी नहीं करोगे
तब तक अंत को भी सोच लेंगे मोदी जी
लच्छेदार बातों के भरोसे मत रहिएगा
ताकते रहोगे ऐसी लोच लेंगे मोदी जी
नए पंछियों को कहिए कि घोंसले में रहें
उड़ने लगे तो पर नोच लेंगे मोदी जी

भारत की संसद की नींव न डिगा सकोगे
जनता को अभी संविधान पे भरोसा है
भूख के सवाल का जवाब खोज लेंगे हम
भारत को अपने किसान पे भरोसा है
आपस का सारा मतभेद भूल जाएंगे जी
राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान पे भरोसा है
दुश्मनों की साज़िशों से डरते नहीं हैं क्योंकि
सीमाओं पे जूझते जवान पे भरोसा है

✍️ चिराग़ जैन

छप्पन इंची

अपमानित होना पड़ता सैनिक के खून पसीने को
रोक नहीं पाए हैं अब तक उग्रवाद के कीने को
आईएसआईएस ने मरहूम किया बेटों के जीने को
शहद लगाकर चाटेंगे क्या छप्पन इंची सीने को

✍️ चिराग़ जैन

पूरी राजनीति हो गई मवाली

पूरी राजनीति हो गई मवाली,
सभी के सब जाली
हैं होली के रंग रसिया
एक-दूसरे को मार मार ताली,
सुनावें रोज़ गाली
ये ठीक नहीं ढंग रसिया

अभी चाय का शोर थमा था, तभी पकौड़ा आ पहुंचा
देसी गदहे नहीं चले तो, अरबी घोड़ा आ पहुंचा
नरसिम्हा से मुक्त हुए तो देवेगौड़ा आ पहुंचा
पहला पकड़ा नहीं गया था, नया भगौड़ा आ पहुंचा
जाने कैसी करी रे रखवाली,
थमा के उन्हें ताली
क्यों छान रहे भंग रसिया

पहले हमसे वोट, अनोखे स्वप्न दिखाकर छुड़वा ली
कांग्रेस की करतूतों का राग सुनाकर छुड़वा ली
भारत में रहकर दी राहत, बाहर जाकर छुड़वा ली
सब्सिडी भी ऊँची-ऊँची बात बनाकर छुड़वा ली
करी डीजल की टंकी भी खाली,
चिढ़ाने लगी थाली
ज़माना हुआ तंग रसिया

हाथ बांधकर घर बैठे हैं लालकृष्ण आडवाणी जी
अच्छे अच्छे मांग गए थे जिनके आगे पानी जी
बंद कर दिए नोट अचानक खूब करी मनमानी जी
सबको समझा दिया मिनिट में माया आनी जानी जी
सबने सड़कों पे लाइनें लगा ली,
मशीनें नोटों वाली
महीनों रहीं दंग रसिया

मंगलयान गया तो उसका पूरा क्रेडिट ले भागे
बुलेट ट्रेन को कर्जा लेने तुम दौड़े आगे-आगे
जिसने तुम पर प्रश्न उठाया उस पर ही गोले दागे
न्याय मीडिया तक आ पहुंचा बस उस रोज़ नहीं जागे
बेच खाई विरोधियों की गाली,
बिगड़ती संभाली
तू पूरा मलंग रसिया

सुखरामों की किस्मत खुल गई, मुफ़्ती से इंसाफ हुआ
नीतिश बाबू से झगड़े का ऊँचा पर्वत हाफ हुआ
अच्छा-बुरा चरित्र धुल गया, नीति-नियम का लाफ़ हुआ
जिसने बीजेपी जॉइन की उसका दामन साफ हुआ
आधी कांग्रेस खुद में मिला ली,
ये चाय वाली प्याली
हुई है बदरंग रसिया

योगी ने भगवा रंग डाला बाकी रंग निचोड़ दिया
अमित शाह ने हर प्रदेश में बीजेपी बम फोड़ दिया
नोट बंद कर जीएसटी से सब व्यापार झिंझोड़ दिया
जनता की पॉकेट पे तुमने अरुण जेटली छोड़ दिया
हाय कैसी ये चौकड़ी बना ली,
हुए हैं सब ठाली
मचाया हुड़दंग रसिया

✍️ चिराग़ जैन

बेरोज़गारी का उपाय

यौवन के हाथ करछी-कड़ाही में घिरे तो
सीमाओं पे शत्रुओं के बान कौन थामेगा
चटनी के स्वाद चखने लगी जवानी गर
बैरियों की तिरछी जुबान कौन थामेगा
जनता के दुःख देखकर जब धरती पे
फटने लगेगा आसमान; कौन थामेगा
देश के युवा यदि पकौड़े बेचने लगे तो
देश के विकास की कमान कौन थामेगा

✍️ चिराग़ जैन

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