वतन के नाम
अगर दुश्मन करे आग़ाज़, हम अंजाम लिख देंगे
लहू के रंग से इतिहास में संग्राम लिख देंगे
हमारी ज़िंदगी पर तो वतन का नाम लिखा है
अब अपनी मौत भी अपने वतन के नाम लिख देंगे
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Muktak, Poetry, Unpublished
अगर दुश्मन करे आग़ाज़, हम अंजाम लिख देंगे
लहू के रंग से इतिहास में संग्राम लिख देंगे
हमारी ज़िंदगी पर तो वतन का नाम लिखा है
अब अपनी मौत भी अपने वतन के नाम लिख देंगे
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Muktak, Poetry
मैंने मुस्कानें भोगी हैं अब मैं ग़म भी सह लूँगा
स्मृतियाँ दिल में उफनीं तो आँसू बनकर बह लूँगा
तुम सपनों की बुनियादों पर रँगमहल चिनवा लेना
मैं यादों के ताजमहल में शासक बनकर रह लूँगा
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Muktak, Poetry, Unpublished
ये अंधेरा दिए से डरता है
या फ़क़त एहतराम करता है
वो भी दीपक ही है जो सारा दिन
रात होने की दुआ करता है
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Ghazal, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Poetry
जब तलक़ दिल में आह बाक़ी है
तब तलक़ वाह-वाह बाक़ी है
अब कहाँ कोई ज़ुल्म ढाता है
ये पुरानी कराह बाक़ी है
ख्वाब सारे फ़ना हुए लेकिन
देखिए ख्वाबगाह बाक़ी है
मैंने सब कुछ लुटा दिया लेकिन
अब भी इक ख़ैरख्वाह बाक़ी है
जिस्म को रूह छोड़ती ही नहीं
हो न हो कोई चाह बाक़ी है
ज़िन्दगानी भटक गई तो क्या
हर जगह एक राह बाक़ी है
कट चुका है शजर कभी का मगर
अब भी धरती पे छाह बाक़ी है
मिरे दिल को कचोटता है बहुत
मुझमें मेरा ग़ुनाह बाक़ी है
मिरी यादों के शामियाने में
एक भीगी निगाह बाक़ी है
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Ghazal, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Poetry
हादसा थी ज़िन्दगी, होता रहा जो उम्र भर
दौलते-लमहात थी, खोता रहा जो उम्र भर
कौन समझे उसके अश्क़ों की ढलकती दास्तां
बस दरख़तों से लिपट, रोता रहा जो उम्र भर
अब तो कलियों से भी उसकी पीठ क़तराने लगी
पत्थरों को गुल समझ ढोता रहा जो उम्र भर
इक न इक दिन उसका घर अश्क़ों में डूबेगा ज़रूर
सबके आंगन में हँसी बोता रहा जो उम्र भर
मौत को देखा तो वो भी कसमसा कर रो दिया
ज़िन्दगी को बोझ-सा ढोता रहा जो उम्र भर
मौत ने आकर जगाया तो सुबककर रो पड़ा
ऑंख में सपने लिए सोता रहा जो उम्र भर
मौत जब आई तो मौक़ा देखते ही बेहिचक
उड़ गया पिंजरे में इक तोता रहा जो उम्र भर
✍️ चिराग़ जैन
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