Chirag Jain Writings, Free Verse, Mann To Gomukh Hai, Poetry
प्रेम
जीवन का याचक नहीं
ख़ुशियों का सौदागर है।
मुनाफ़ाख़ोर नहीं है प्रेम
एक पल की
ख़ुशी के बदले
एक ही पल लेगा
हमारे जीवन से
फिर हम
जीवन भर
प्रसन्न रहें
उस पल की
स्मृतियों में।
प्रेम
कभी नहीं आएगा
स्मृतियों की
राॅयल्टी मांगने।
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Free Verse, Mann To Gomukh Hai, Poetry
तुम हमेशा
मुझे दोषी ठहराती हो
कि मैं अपने रिश्तों में
उम्मीदें बहुत रखता हूँ
लेकिन समझ नहीं पाता हूँ मैं
कि उम्मीद के बिना
निभ ही कैसे सकता है
कोई रिश्ता
…..उम्मीद के बिना तो
दान तक नहीं दिया जाता!
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Free Verse, Mann To Gomukh Hai, Poetry
दुःख का अभाव
सुख नहीं है।
मुश्किल की अनुपस्थिति
आसानी नहीं है।
दरअस्ल
आसान तो
कुछ है ही नहीं
जीवन एक अवसर है
कम मुश्किल का
चयन करने के लिए।
मुझे चुनना था
दो में से एक वाक्यांश-
“काश ये न होता!”
या
“काश वो होता!”
मैंने दूसरा विकल्प चुना।
सुखी हूँ या नहीं
कह नहीं सकता
लेकिन
दुःखी बिल्कुल नहीं हूँ।
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Geet, Poetry, Unpublished
जिस डाली का काटा जाना आज अखर जाता है तुमको
उस डाली के कटने से ही कल को तुम फलदार बनोगे
जिस छैनी के छूने भर से चीख़ निकलती है पत्थर की
उस छैनी की चोटों से तुम पूजा के हक़दार बनोगे
अनुभव के दो हाथ समूचे माटी-माटी सन जाएंगे
तब जाकर मिट्टी के ढेले को किंचित आकार मिलेगा
मिट्टी से पहले हाथों की भाग्य लकीरें घिस जाएंगी
तब बर्तन कहला पाने का मिट्टी को अधिकार मिलेगा
जिन जलते शोलों से तन-मन सब कुछ झुलसेगा भीतर तक
उनके कारण ही तुम प्यासे ओंठों पर बौछार बनोगे
गंगा बनकर पुजना है तो, गोमुख से झरना ही होगा
बूंदों को बारिश बनना है, बादल को मरना ही होगा
रामशरण स्वीकार नहीं हो, और मुक्ति की इच्छा हो तो
कंचन मृग का स्वांग रचा कर, सीता को हरना ही होगा
अपने सारे सुख को अपने हाथों वनवासी कर दोगे
तब सम्भव है तुम जीते जी धरती पर अवतार बनोगे
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Muktak, Poetry, Unpublished
ग़मों का दौर है आफत में जान है लेकिन
कुछ ऐसी बात चले रंग और हो जाए
फिर एक बार फुर्सतों पे नूर आया है
चलो कि फिर से ठहाकों का दौर हो जाए
✍️ चिराग़ जैन