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क़ुसूर

सज़ाओं में मैं रियायत का तलबदार नहीं क़ुसूरवार हूँ कोई गुनाह्गार नहीं मैं जानता हूँ कि मेरा क़ुसूर कितना है मुझे किसी के फ़ैसले का इंतज़ार नहीं ✍️ चिराग़...

दुःख

वाह के मज़मों में अक्सर मौज़ूद होती है आह भी। जैसे बहुत कुछ पा लेने पर भी नहीं मिट पाती है कसक कुछ खो जाने की। दुःख जन्मता है ख़ुशियों की कुक्षि से कदाचित् यही सिद्ध करने के लिये जलती हैं खलिहानों में रखी फ़सलें फटते हैं धरती पर उतरते अंतरिक्ष-यान मरते हैं जवान बेटे...

दुश्मनों के सर

काली अमावस का अंधेरा होम करने को, दीवाली के दीप सामधेनी बन जाएंगे पीड़ा वाली ज्वालाएँ जहाँ प्रचण्ड होंगी, वहाँ शांति-धार बरसाने प्रेम-घन जाएंगे बलिदान हुए यदि कहीं तेरे लाडले तो अरथी सजाने केसरी-सुमन जाएंगे पर यदि तलवार चली रणबाँकुरों की, शत्रुओं के शीश तेरी ही शरण...

मानवता

अपने आप से दूर हो रहे लोग इंसानियत से अधिक आवश्यक हो रहे भोग अदालतों में टूटता भाई-बहन का प्यार अस्सी साल की नारी का बलात्कार पश्चिम की धुनों पर थिरकता यौवन चुनाव-दर-चुनाव बढ़ता प्रलोभन बेटियों को बेचकर ख़रीदा गया राशन धर्ममंचों से पढ़ा जा रहा राजनैतिक भाषण स्कूलों के...
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