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सब कुछ तेरे पास है

अपने भीतर झाँक ले, अपना हृदय टटोल सब कुछ तेरे पास है, अपनी आँखें खोल ✍️ चिराग़ जैन

आदमी मायूस होता है

हवस की राह चलकर आदमी मायूस होता है सदा आपे से बाहर आदमी मायूस होता है कभी मायूस होकर आदमी खोता है उम्मीदें कभी उम्मीद खोकर आदमी मायूस होता है न हो उम्मीद तो मायूसियाँ छू भी नहीं सकतीं हमेशा आरज़ू कर आदमी मायूस होता है हज़ारों ख्वाब बेशक़ बन्द ऑंखों में पलें लेकिन पलक...

परोक्ष

किसी का क़द ज़रा उठ जाए तो सब देख लेते हैं किसी का पद ज़रा उठ जाए तो सब देख लेते हैं कहाँ गहराई है किसकी यही सबको नहीं दिखता कोई बरगद ज़रा उठ जाए तो सब देख लेते हैं ✍️ चिराग़...

इक अदद इन्सान

मैंने कब चाहा कि सिर पर ताज होना चाहिए बस मिरे माथे पे माँ का इक दिठोना चाहिए दिल में बेशक़ इक बड़ा अरमां संजोना चाहिए चंद क़तरे ऑंख में पानी भी होना चाहिए घर में ख़ुशियों के लिए कालीन या मखमल नहीं एक छोटा-सा मुहब्बत का बिछोना चाहिए ऑंसुओं की मूक भाषा को समझने के लिए हर...

कोई यूँ ही नहीं चुभता

कोई चीखा है तो उसने बड़ी तड़पन सही होगी कोई यूँ ही नहीं चुभता कहीं टूटन रही होगी किसी को सिर्फ़ पत्थर-दिल समझ कर छोड़ने वालो टटोलो तो सही उस दिल में इक धड़कन रही होगी ✍️ चिराग़...
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