कौरव
लड़ने को तो लड़ ही लूंगा, लेकिन ये डर लगता है
कौरव से लड़ते-लड़ते मैं ख़ुद कौरव ना हो जाऊँ
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Ghazal, Poetry, Unpublished
लड़ने को तो लड़ ही लूंगा, लेकिन ये डर लगता है
कौरव से लड़ते-लड़ते मैं ख़ुद कौरव ना हो जाऊँ
✍️ चिराग़ जैन
Chhookar Nikli Hai Bechaini, Chirag Jain Writings, Geet, Poetry
तुम खरगोशों के अनुयायी
मैं हूँ कछुए का पथगामी
बचपन के किस्सों से पूछो
आख़िर में जय किसकी होगी
जब सारस को आमंत्रित कर
खीर परोसी थी थाली में
लम्बी चोंच लिए बेचारा
कैसे जल पीता प्याली में
दृश्य मगर परिवर्तित होगा
सारस का भी दिन आएगा
शर्बत युक्त सुराही होगी
धूर्त देख कर पछताएगा
बंदर को छलने की नीयत
मूर्ख मगर को रिस्की होगी
बचपन के किस्सों से पूछो
आख़िर में जय किसकी होगी
आज कथा का पहला दिन है
आज बया का घर टूटेगा
संत लुटेगा, चोर हँसेगा
पाप अभी चांदी कूटेगा
लेकिन ज्यों ज्यों बात बढ़ेगी
कौआ मीठा जल पाएगा
ऊँची हांडी की खिचड़ी से
बूढ़ा ब्राह्मण फल पाएगा
वैसा हाल बनेगा उसका
जैसी करनी जिसकी होगी
बचपन के किस्सों से पूछो
आख़िर में जय किसकी होगी
ताल किनारे लक्कड़हारा
सच कहने का फल पाएगा
भगत बना बगुला खुद इक दिन
कर्क गरल से छल जाएगा
हाथी को चींटी डस लेगी
सच का मुश्किल पंथ नहीं है
न्याय अगर है न्यून जहाँ तक
वह किस्से का अंत नहीं है
खुद गड्ढे में गिर जाएगा
जिसने भी साजिश की होगी
बचपन के किस्सों से पूछो
आख़िर में जय किसकी होगी
✍️ चिराग़ जैन
Article, Bakodhyanam, Chirag Jain Writings, Prose
अश्लीलता समाज के लिए हानिकारक है और समाज अश्लीलता के लिए। पार्क में पेड़ के पीछे बैठी लड़की तभी अश्लील कही जा सकती है जब वो मेंरे साथ न बैठी हो। यदि उसको मेरे साथ बैठने में ऐतराज़ न हो तो मुझे नाक-भौं चढाने वालों को अनपढ़ और मैनर्सलैस कहने में क्या एतराज़ हो सकता है।
पड़ोसी की बीवी को कपड़े सुखाते देखकर आहें भरनेवाले जब उसको दूधवाले से हंसकर बात करते देखकर बातें बनाते हैं तो ऐसा लगता है जैसे योगाचार्य उबकाई को चिगलते हुए हाज़मा दुरुस्त करने की कसरत करा रहा हो। लेकिन योगाचार्य कसरत कराता है साहब। उबकाई आती रहती है। कसरत करने वाले हाथ हिलाते रहते हैं। कसरत करने वालियां सांस लेती रहती हैं। कसरत कराने वाला भी सांस लेता रहता है।
खैर छोड़िये हम अश्लीलता पर थे।
योगा में अश्लीलता कहाँ। अश्लीलता अंग्रेजी में अश्लीलता नहीं रहती। उन गलियारों में वो मॉडर्न होती है। अश्लील लोग लड़कियों को पीठ पीछे माल, बम, पटाखा, आइटम जैसे भद्दे शब्दों से बुलाते हैं लेकिन सभ्य लोग उनको मुँह पर बेहिचक हॉट और सैक्सी कहते हैं । वो एडवांस जो हैं।
अश्लीलता का दायरा लिंगभेद भी जानता है। फिल्म के पोस्टर पर सनी लियोने का भीगे कपडे से ढंका चित्र अश्लील है लेकिन पीके के पोस्टर पर आमिर खान का रेडियो की ओट में समाया बदन आर्टिस्टिक है। रेडियो और कपडे का क्या मुकाबला साहब। रेडियो आमिर खान को पसंद है। इसलिए वो ग्रेट है। सनी की चद्दर में कहाँ कुछ छिपता है यार। इसलिए विरोध हुआ। हमें अंडर एस्टीमेट कर डाला। हमने साड़ी वाली माधुरी को भी उसी सौन्दर्यपरक नज़र से देखा था, ये भीगी चद्दर वाली…..हुँह।
सड़क पर खड़ी लडकियों को जब कोई गुंडा छेड़ता है तो अक्षय कुमार उसकी धुलाई कर डालते हैं। क्योंकि वो हीरो हैं। फिर अक्षय कुमार खुद उनको छेड़ते हैं। लेकिन वो अश्लील थोड़े ही हैं, वो तो हीरो हैं।
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Muktak, Poetry, Unpublished
तीर कोरे स्वार्थ के जब तरकशों से जुड़ गए
बाम पर बैठे कबूतर फड़फड़ाकर उड़ गए
स्वार्थ शामिल हो गया जब से हमारी सोच में
पग हमारे ख़ुद-ब-ख़ुद राहे-गुनाह पर मुड़ गए
✍️ चिराग़ जैन
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