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कृष्ण हो पाना कठिन है

रीतियों को तोड़ने का बल जुटा पाना कठिन है बल जुटा लो तो सभी से बात मनवाना कठिन है तर्जनी पर न्याय ठहराना कठिन है रे। कृष्ण हो पाना कठिन है रे। हर किसी की पीर का संज्ञान होना खेल है क्या शब्दहीना आस का अनुमान होना खेल है क्या प्रश्न, जिज्ञासा, शिक़ायत ही मिलें सबके नयन...

जीतकर पछता रहे हैं

जब तलक संघर्ष में थे, व्यस्तता के हर्ष में थे दृश्य कितने ही मनोरम, कल्पना के स्पर्श में थे स्वप्न जबसे सच हुआ, उकता रहे हैं हम जीतकर पछता रहे हैं हम जब हमें हासिल न थी, मंज़िल लुभाती थी निरन्तर बाँह फैलाए हमें हँसकर बुलाती थी निरन्तर पर पहुँच कर जान पाए, है निरी रसहीन...

सुख का आमंत्रण

पीड़ा की तैयारी कर लो, सुख का आमंत्रण आया है जब-जब कंचन मृग देखा है, तब-तब इक रावण आया है ईश्वर का अवतार जना है, माता को अभियोग मिलेगा कान्हा जैसा लाल मिला है, आगे पुत्रवियोग मिलेगा नारायण के बालसखा ने निर्धनता के कष्ट सहे हैं वंशी के रसिया जीवनभर, समरांगण में व्यस्त...

माखनचोर

कान्हा के किरदार का, कोई ओर न छोर इक पर वो जगदीश है, इक पल माखनचोर गोपी, ग्वाले, बांसुरी, रास, नृत्य, बृजधाम ये सारा कुछ कृष्ण का, केवल इक आयाम ✍️ चिराग़...
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