Article, Bakodhyanam, Chirag Jain Writings, Prose
जब हम लालकिले पर भाषण देने जाते हैं तो सीमा पार आतंकवाद की बोलती बंद करने का दम्भ भरते हैं। जी-20 शिखर वार्ता में व्यापार-धंधे की बातें करने जाते हैं तो आतंक के सफाए की गुहार लगाने लगते हैं। चुनाव में प्रचार करने जाते हैं तो 56 इंच का सीना दिखाकर उस पाकिस्तान को डराने लगते हैं, जिसे वोट नहीं देना।
लेकिन पाकिस्तान डरता नहीं है। वह आता है और पठानकोट में उत्पात मचा कर चला जाता है। हमारा काफी नुक़सान होता है। हम उसे मारने की हिम्मत नहीं कर पाते। बल्कि खिसियाते हुए अपनी खिड़की में दुबककर मुर्गे की तरह गर्दन निकाल कर बोलते हैं – “अबकी बार मत आ जाइयो, वरना छोड़ेंगे नहीं।” …वह इस धमकी को सुनता है, ज़ोरदार ठहाका मारकर हँसता है और उरी की फुलवारी तहस-नहस करके भाग जाता है।
हमारे स्वाभिमान और शौर्यबोध की स्थिति उस अंधे भिखारी जैसी हो गई है जिसे गली के शरारती बच्चे छेड़-छेड़ कर ललकारते हुए भाग जाते हैं और वह हवा में लकड़ी घुमाते हुए अपनी बेचारगी को खोखले क्रोध से ढाँपने की असफल कोशिश करता-करता रो पड़ता है। अंधा रोता रहता है, बच्चे उसकी इस दशा देखकर ज़ोर-ज़ोर से हँसते रहते हैं।
हमारे प्रधानमंत्री जी को उस भिखारी की दशा पर दया आती है। वे उसके आंसू पोंछते हैं। उसे हौसला देते हैं। उसे बताते हैं कि ये बच्चे तो बहुत छोटे हैं। तुम इतने बड़े हो। घबराओ मत। अबकी बार ये तुम्हें छेड़ें तो तुम इन्हें ऐसी पटखनी देना कि याद रखें। मेरी भुजाओं में बहुत शक्ति है। मैं तुम्हारी सहायता करूँगा। इन शरारती लड़कों को अपनी शेर जैसी दहाड़ से बिलों में घुसा दूँगा। तुम चिंता मत करो। अमरीका, रूस, जापान, चीन, इंग्लैण्ड सब जगह मेरी पहुँच है। तुम आराम से जियो। मैं तुम्हारे साथ हूँ।
अंधे का आत्मविश्वास जाग जाता है। बच्चे फिर आते हैं। भिखारी के कंधे पर चिकौटी काटते हैं। अंधा ज़ोर से लकड़ी उठा कर चारों ओर घुमा देता है। बच्चे भाग जाते हैं और वह लकड़ी खुद उस अंधे के माथे पर आ लगती है। अंधा क्रोध, पीड़ा, अपमान, भय और विवशता से आहत होकर धरती पर गिर जाता है।
प्रधानमन्त्री जी उसे बचाने नहीं आते। बचाना तो दूर वे उसे उठाने तक नहीं आते। उनके मंत्रिमंडल के पास समय ही नहीं है उस धराशायी शौर्यबोध को उठाने का। वे सब बहुत व्यस्त हैं। उन्हें केजरीवाल की लंबी जीभ पर टिप्पणी करनी है। उन्हें राहुल गांधी को पप्पू कहकर इमेज डैमेज करना है। उन्हें जियो की एड फ़िल्मशूट करनी है। उन्हें सूट का नाप देने जाना है। उन्हें अपने सीने का नाप लेकर जनता को बताना है। उन्हें नियुक्तियाँ पूरी करनी हैं। उन्हें बुलेट ट्रेन लानी है। उन्हें बहुत कुछ करना है जनाब। उन्हें डिस्टर्ब मत करो।
ये अड़ोस-पड़ोस के बेमतलब मुआमलात में उनको घसीटकर उनका समय नष्ट मत करो। चलो हटो यहाँ से। साहब को प्राणायाम करने दो।
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Naavik ke teer, Prose, Quotation
भारतीय सेना दैदीप्यमान सूरज है। उसे घूर कर देखोगे तो उसके बाद एक दिन क्या पूरा जीवन ही काला दिखाई देगा।
हमें क्या पता था कि कश्मीरियों ने जो पत्थर भारतीय सेना पर फेंके थे वो पाकिस्तान की अक्ल पर जा पड़ेंगे।
जिस सिस्टम से हम जीवन की मूलभूत ज़रूरतों की मांग करते हैं, वो मरने की व्यवस्था भी ठीक से कर देता तो गनीमत थी।
पाकिस्तान को तो देवी मैया ने बचा रखा है। अगर नवरात्रों ने “लाहौरी नमक” न खाया होता तो भारत माता इस ससुरे को कबका महिषासुर बना चुकी होती।
✍️ चिराग़ जैन
Article, Chirag Jain Writings, Lapete Mein Netaji, Prose
“क्यों भैया, ये सरकार ने विजय माल्या को तभी क्यों नहीं पकड़ लिया जब वो भारत में था?”
डायलॉग- “हम तुम्हें पकड़ेंगे माल्या। लेकिन वो ज़मीन भी हमारी नहीं होगी, देश भी हमारा नहीं होगा और वक़्त भी हमारा नहीं होगा।”
“क्यों जी, ये बैंकों ने माल्या को इतना लोन कैसे दे दिया?”
डायलॉग- “कौन कम्बख़्त ज़माने के लिये बनाता है, हम तो बनाते हैं ताकि उसे पीकर बैंक वाले लोन का अमाउंट पढ़ न सकें।”
“ये श्री श्री रविशंकर पाँच करोड़ रुपये के लिये मुक़द्दमेबाज़ी करता अच्छा लगेगा?”
डायलॉग- “तारीख़ पे तारीख़, तारीख़ पे तारीख़, तारीख़ पे तारीख़ मिलती रहेगी, लेकिन इन्साफ़ नहीं मिलेगा। और जब तक इन्साफ़ मिलेगा तब तक हम जमुना के किनारे को साफ़ कर चुके होंगे मीलॉर्ड।”
“वर्ल्ड कल्चरल फ़ेस्टिवल में मोदी जी के लिये अलग मंच बनाने की क्या ज़रूरत?”
डायलॉग- “डाबर साहब, कुछ साल पहले हम लालकिले से भाषण देना चाहते थे, और हमने अपना मंच लालकिले जैसा बना लिया था। …मैं आज भी बने-बनाए मंच पर नहीं जाता।”
“केजरीवाल को कराची लिटरेचर फ़ेस्टिवल में जाने की इज़ाज़त मिलेगी या नहीं?”
डायलॉग- “एक काग़ज़ पर मुहर नहीं लगेगी तो का केजरी पाकिस्तान नहीं जाएगा? अरे चाहे सल्लू मियां की पद्दी पर लदकर जाना पड़े लेकिन उसे कराची जाकर अपना साहित्य प्रेम दिखाने से कोई सरहद, कोई ताक़त नहीं रोक सकती।”
“भैया पाकिस्तान की क्रिकेट टीम को सुरक्षा की लिखित गारंटी क्यों चाहिये?”
डायलॉग- “जिनके घर शीशे के होते हैं, वो दूसरों के घरों पर पत्थर नहीं फेंका करते।”
✍️ चिराग़ जैन
Article, Chirag Jain Writings, Lapete Mein Netaji, Prose
एक गुजराती का वीज़ा अमरीका ने ठुकराया था।
…गुजराती ने प्रधानमंत्री बनकर अमरीका को मजबूर कर दिया।
अब एक कश्मीरी का वीज़ा पाकिस्तान ने ठुकराया है।
…सुरक्षा एजेंसियाँ ध्यान रखें, भाई ने यू ट्यूब पर वीडियो अपलोड करना तो सीख लिया है।
चलो इस बहाने ये तो पता चला कि पाकिस्तान जाने के लिए भी वीज़ा की ज़रूरत पड़ती है, वरना अब तक मैं समझता था कि राष्ट्रगान का अपमान ही पर्याप्त है।
✍️ चिराग़ जैन
Article, Chirag Jain Writings, Lapete Mein Netaji, Prose
अमित शाह – “अबे ओये, हिंदी में बोल”
मोदी – “इसकी भाषा समझने से अच्छा है कि मैं भारतीय रेल की समस्याएं समझ लूँ।”
बाबा रामदेव – “आप पतंजलि की बुलेट ट्रेन क्यों नहीं चलवाते।”
केजरीवाल – “बुलेट में भी ईवन-ऑड सिस्टम लाएंगे। एक दिन दूसरा, चौथा, छठा, आठवां डिब्बा चलेगा; और दूसरे दिन पहला, तीसरा, पांचवां, सातवां औए नौवां। सन्डे को केवल इंजन चलेगा।”
राहुल गांधी – “मम्मी, शिन चैन के भाषण में मोदी जी गाने क्यों सुन रहे हैं।”
✍️ चिराग़ जैन