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इक अदद इन्सान

मैंने कब चाहा कि सिर पर ताज होना चाहिए बस मिरे माथे पे माँ का इक दिठोना चाहिए दिल में बेशक़ इक बड़ा अरमां संजोना चाहिए चंद क़तरे ऑंख में पानी भी होना चाहिए घर में ख़ुशियों के लिए कालीन या मखमल नहीं एक छोटा-सा मुहब्बत का बिछोना चाहिए ऑंसुओं की मूक भाषा को समझने के लिए हर...
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