Article, Bakodhyanam, Chirag Jain Writings, Prose
भारत देश ही ऐसा है कि जो भी यहाँ आता है, जल्दी ही यहाँ के रंग-ढंग सीख जाता है। कोविड कि साथ भी यही हुआ। हमने उसे भारत में रहने के नियम-क़ायदे सिखाने में देर नहीं लगायी। अब कोविड हर रोज़ सुबह उठकर अख़बार पढ़ता है और सरकारी गाइडलाइंस के अनुसार अपनी दिन भर की प्लानिंग करता है। यह लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान है।
रुकी हुई हवाई सेवाएँ प्रारम्भ करते हुए सरकार ने बताया कि मिडिल सीट ख़ाली रखनी है। हवाई अड्डे पर पहुँचने से पहले वेब चेक इन करना है। आरोग्य सेतु एप में ग्रीन स्टेटस होना आवश्यक है। हेल्थ डिक्लेरेशन वेब चेकइन के समय ही भरवा लिया गया। हवाई अड्डे पर थर्मल स्क्रीनिंग और न जाने क्या-क्या नियम बनाकर कोविड से सुरक्षा के उपाय किये गये।
बाद में पता चला कि इन सब नियमों में एयरलाइंस की कमाई की संभावनाएँ खुल गयी हैं। वेब चेक इन करते समय जहाज में कोई भी सीट निःशुल्क नहीं है। अगर आप एयरपोर्ट आकर चेक इन करेंगे तो एयरलाइंस आपसे 100 रुपये चार्ज करेगी। मतलब कोविड को समझा दिया गया है कि जो सौ रुपये ख़र्च करे, उसके नहीं चिपटना है।
जिस मिडिल सीट को ख़ाली रखना था उस पर डिस्पोजेबल सूट पहनाकर यात्री बैठाये जा रहे हैं। अगर कोई घर के कपड़े पहनकर सोशल डिस्टेंसिंग का उल्लंघन करेगा तो कोविड उसे पकड़ लेगा। लेकिन अगर किसी कोई सफेद क़फ़न टाइप का ढकोसला लपेटकर दोनों तरफ़ के लोगों से सटकर बैठे तो उससे कोविड ख़ुद डिस्टेंस रखेगा। जिस आरोग्य सेतु एप्लिकेशन के न होने पर प्रारम्भ में लोगों को हवाई अड्डे में घुसने नहीं दिया जा रहा था, उसको अब कोई चैक तक नहीं कर रहा है।
उधर कोविड को यह भी समझ आ गया है कि इस मुल्क में राजनैतिक गतिविधियों से अधिक महत्वपूर्ण कुछ नहीं है। इसीलिए श्मशान में जलती चिताओं के पास खड़े शोकाकुल परिजनों की गिनती की गयी, बारात में बारातियों की गिनती की गयी, बाज़ार में समान बेचते दुकानदारों के चालान काटे गये लेकिन किसी राजनैतिक पार्टी के सदस्यता अभियान में हज़ारों लोगों की उपस्थिति से कोई समस्या खड़ी नहीं हुई क्योंकि वहाँ कोविड के घुसने पर मनाही थी।
बिहार में चुनावी रैलियों में भीड़ आती है तो राजनेता इतराते हुए उसकी फोटो ट्वीट करके अपनी लोकप्रियता का प्रमाण प्रस्तुत करते हैं। क्योंकि कोविड को पहले ही समझा दिया गया है कि ‘देखो भाई, तुम्हारा वोटर कार्ड नहीं बना है इसलिए रैली के आसपास भी मत दिखना।’
कोविड समझता है कि सरकारी कामकाज में अड़ंगा लगाया तो उसको जेल में बन्द कर दिया जाएगा। इसलिए कोविड सरकारी नियमों का पालन करता है। सरकार ने सिनेमाघरों में एक सीट छोड़कर बैठने की इजाज़त दी है तो कोविड को समझ आ गया है कि उसके लिये सिनेमाघरों में स्थान छोड़ दिया गया है, अब वह उस छोड़ी हुई सीट के दोनों ओर बैठे लोगों को तंग नहीं करेगा।
कोविड जानता है कि जलती हुई चिता के आसपास लोग भीड़ लगाकर खड़े हो जाते हैं, उनको पकड़ना चाहिए, लेकिन रैली में लोग लोकतंत्र के लिए जान हथेली पर रखकर आते हैं। इन देशभक्तों का सम्मान करना चाहिए।
किसी से हाथ मिलाओगे तो कोविड फैल सकता है लेकिन चुनावी रैली में कोई नेता पोडियम के साथ खड़ी रोती हुई महिला को गले लगाकर चुप कराता है तो कोविड भावुक होकर दूर खड़ा रहेगा।
वह दिन दूर नहीं जब कोविड बाक़ायदा रसीद बुक लेकर सड़कों पर खड़ा होगा और आते-जाते लोगों को रोककर उन्हें कहेगा कि 100 रुपये की रसीद कटवा लो, वरना क्वारन्टीन करवा दूंगा।
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Geet, Lapete Mein Netaji, Poetry
क्या करना है कारोबार
कल और इलेक्सन होंगे
कल और इलेक्सन होंगे, घनघोर इलेक्सन होंगे
हर ओर इलेक्शन होंगे, पुरजोर इलेक्शन होंगे
सब कुछ मुफ्त मिलेगा यार
कल और इलेक्सन होंगे
एमपी वाले चावल देंगे, दिल्ली वाई-फाई
पटना जाकर फोकट में ले लेंगे यार दवाई
मेहनत के मुँह पर पोतेंगे, उंगली की सब स्याही
जब उंगली से काम चले तो काहे देह हिलाई
महंगा वोटों का बाजार
कल और इलेक्सन होंगे
हर नेता में होड़ लगी है, ख़ूब लुटाओ पैसा
राजनीति में सब जायज़ है, इसमें खटका कैसा
भैंस उसी की, जिसने अपने खूंटे बांधा भैंसा
उसने ऐसी-तैसी की थी, हमने ऐसा-तैसा
जी भर जीमो बिना डकार
कल और इलेक्सन होंगे
✍️ चिराग़ जैन
Article, Chirag Jain Writings, Prose, Shabdon Ki Kunjgaliyaan
राजनीति किसी भी दल की हो, उसकी बदतमीज़ी जनता की निष्क्रियता के बल पर ढिठाई बनने लगती है। भारतीय लोकतंत्र के वर्तमान स्वरूप में ‘मतदान’ ही एकमात्र अस्त्र है जो जनता के पास है। शेष तंत्र से हताश होकर इस अस्त्र को भी नष्ट कर देना, भ्रष्टाचारियों को बढ़ावा देने जैसा है।
जिस क्षेत्र की जनता पूर्ण मतदान कर देगी, उसकी अभिरुचियों और आकांक्षाओं को अनदेखा करना किसी भी दल के लिए असंभव होगा। मध्यमवर्ग की ज़रूरतें किसी भी राजनैतिक दल की वरीयता सूची में इसी कारण नहीं शामिल हो पातीं क्योंकि मध्यमवर्गीय नागरिक मतदान प्रक्रिया से सर्वाधिक उदासीन हैं। राजनीति हमें लोकतंत्र से बाहर करना चाहती है, ताकि अपने कैडर और कार्यकर्ताओं के वोट से ही विधानसभाओं और संसद की सूरत तैयार हो सके। आम मतदाता यदि वोटिंग की प्रक्रिया से न जुड़ा तो उसकी ओर किसी का ध्यान न जाएगा।
इस देश में, आयकर देनेवालों से किसी सरकार को कोई फ़र्क नहीं पड़ता, इसीलिए बजट बनाते समय आयकर देनेवालों को ही घोड़े से खच्चर बनाया जाता है। इस देश में नियमों का पालन करनेवाले भी सरकार के किसी काम के नहीं हैं, इसीलिए पूरी न्याय व्यवस्था अपराधियों के बचाव में जुट जाती है और पीड़ित को सिद्ध करना पड़ता है कि उसके साथ अपराध हुआ है।
लेकिन इस देश में वोट देनेवाले से हर सरकार को फ़र्क़ पड़ता है, इसीलिए झुग्गियों की पीड़ा हर पार्टी सुन पाती है और हाउस टैक्स भरनेवाला बेचारा दफ़्तरों के चक्कर लगा-लगाकर टूट लेता है; इसीलिए अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित किया जाता है और बिल्डरों को पूरी क़ीमत चुकानेवाला नागरिक किराये के मकान में रहकर, अदालतों के चक्कर काट रहा है। वोट को अनावश्यक समझोगे तो राजनीति के लिए अनावश्यक हो जाओगे। इस देश के लिए न सही, लोकतंत्र के लिए न सही; अपने अस्तित्व के लिए ही सही, वोट ज़रूर डालें।
इससे पहले कि लोकतंत्र फीका हो जाए, अपनी उंगली पर नीला निशान लगवा आओ।
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Ghanakshari, Lapete Mein Netaji, Poetry
बार-बार हारने के बाद भी आखिरकार
राहुल जी जीतने लगे हैं हर चाल में
उन्नीस में थोड़ा देख-भालकर फेंकियेगा
खुद ही न फँस जाओ जुमलों के जाल में
कांग्रेसियों को भी संभलकर चलना है
डूबने न लग जाओ, अगले उछाल में
गाय, गधे, घोड़े छोड़कर अब यह सोचो
ऊँट किस करवट बैठे नए साल में
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Geet, Lapete Mein Netaji, Poetry
अभी सबके ही पत्ते खुलेंगे
कि देश में चुनाव आ गए
सारे नेता सड़क पर मिलेंगे
कि देश में चुनाव आ गए
पहला युद्ध टिकट बँटने का हर दल के भीतर होगा
दलबदलू मौका ढूंढेंगे, किस दल में बेहतर होगा
भाषण, रैली, वादे, गाली, पग-पग ये मंज़र होगा
टोपी और किसी की होगी, और किसी का सर होगा
अब तो पानी में पत्थर घुलेंगे
कि देश में चुनाव आ गए
अभी सबके ही पत्ते खुलेंगे
कि देश में चुनाव आ गए
देशप्रेम का रोज़ दिखेगा कोरा ड्रामा, हंगामा
वादे झूठे, जुमले झूठे, झूठा जामा हंगामा
कोई है बेटा जनता का, कोई मामा हंगामा
हर छुटभैया नेता कूदे पहन पजामा, हंगामा
सबके खद्दर के कुर्ते सिलेंगे
कि देश में चुनाव आ गए
सारे नेता सड़क पर मिलेंगे
कि देश में चुनाव आ गए
बीजेपी को रामलला की याद आएगी वोटिंग है
कट्टर दुश्मन से भी हाथ मिला आएगी वोटिंग है
कांग्रेस की करतूतों को गिनवाएगी वोटिंग है
जो भी प्रश्न करोगे उसको भटकाएगी वोटिंग है
असली मुद्दे सड़क पर रुलेंगे
कि देश में चुनाव आ गए
अभी सबके ही पत्ते खुलेंगे
कि देश में चुनाव आ गए
राहुल बाबा को भगवान बनाने निकले कांग्रेसी
जनता को इक गुड्डे से बहलाने निकले कांग्रेसी
बीजेपी के सारे पाप गिनाने निकले कांग्रेसी
नौ सौ चूहे खाकर हज को जाने निकले कांग्रेसी
अब तो कीचड़ से कपड़े धुलेंगे
कि देश में चुनाव आ गए
अभी सबके ही पत्ते खुलेंगे
कि देश में चुनाव आ गए
एक अकेले राहुल गांधी कितना काम करें भैया
पार्टी के हर इक खेमे का युद्ध विराम करें भैया
कुर्ते की बाजू ऊपर करके संग्राम करें भैया
दिन में रैली रात में बैठक, कब विश्राम करें भैया
जन समर्थन में पापड़ बिलेंगे
कि देश में चुनाव आ गए
सारे नेता सड़क पर मिलेंगे
कि देश में चुनाव आ गए
शाम-सवेरे दाग़ रहे जुमलों के गोले मोदी जी
अपने खातों पर रखते हैं सबके झोले मोदी जी
डमरू लेकर कर देते हैं भम भम भोले मोदी जी
हर रैली में मित्रो-मित्रो करते डोले मोदी जी
राहुल बाबा पे जम कर पिलेंगे
कि देश में चुनाव आ गए
सारे नेता सड़क पर मिलेंगे
कि देश में चुनाव आ गए
मनमानी वाले कर पाएं सीएम पद की सैर नहीं
जनता से पूछा तो बोली कांग्रेसी भी ग़ैर नहीं
हम उनको कैसे चुन लें जो भू पर धरते पैर नहीं
मोदी जी से वैर नहीं पर रानी जी की ख़ैर नहीं
हाय इनके न नखरे झिलेंगे
कि देश में चुनाव आ गए
सारे नेता सड़क पर मिलेंगे
कि देश में चुनाव आ गए
✍️ चिराग़ जैन