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मनमोहन सिंह के बयान पर सियासत

जिनको मौनी बाबा कह के चिढ़ाया
उन्हीं का बयान ले उड़े
पहले तुमको निहत्था बताया
फिर हाथ से कमान ले उड़े

कहने भर को पीएम थे पर बोल न पाए मनमोहन
हाथ हिलाना दूर, होंठ तक खोल न पाए मनमोहन
अपने ही घर में प्रतिभा का मोल न पाए मनमोहन
अपना ऑर्डिनेंस फटने पर डोल न पाए मनमोहन
उनके होंठों पे ताला लगाया
ये पूरा हिन्दुस्तान ले उड़े
जिनको मौनी बाबा कह के चिढ़ाया
उन्हीं का बयान ले उड़े

आंदोलन पर लाठी बरसी, कंघी बेची गंजे को
सीबीआई तोता बन गई ऐसा कसा शिकंजे को
अपनी ही बंदूक की गोली धांय लगी है पंजे को
जाने किस-किस बेचारे की हाय लगी है पंजे को
तुमने सोतों पे डंडा चलाया
ये सपनों की दुकान ले उड़े
जिनको मौनी बाबा कह के चिढ़ाया
उन्हीं का बयान ले उड़े

ऊंचाई का अहम न करते तो झुक जाना ना पड़ता
ठोकर पर संभले होते, घुटनों पर आना ना पड़ता
अपनों से मिलते-जुलते तो मान गंवाना ना पड़ता
दूर-दूर तक जनता के दर चलकर जाना ना पड़ता
अपने हाथों ही अवसर गंवाया
ये सत्ता का गुमान ले उड़े
जिनको मौनी बाबा कह के चिढ़ाया
उन्हीं का बयान ले उड़े

✍️ चिराग़ जैन

भाजपा और चुनाव

केलकूलेटर ने भी पकड़े हैं कान
ये जादू मन्तर कैसे सीखा
कहीं मिलते नहीं हाथों के निशान
ये जादू मन्तर कैसे सीखा

नगालैंड में ख़ुद प्रत्याशी वोट न करने आता
त्रिपुरा में वोटिंग पर्सेंटेज सौ से ऊपर जाता
सौ पर्सेंट से भी ज़्यादा मतदान
ये जादू मन्तर कैसे सीखा

प्रत्याशी के प्रस्तावक ही अंडर ग्राउण्ड हुए हैं
बाकी सभी लड़ाकों के भी पर्चे राउण्ड हुए हैं
सबकी सूरत पर है एक ही निशान
ये जादू मन्तर कैसे सीखा

बीजेपी की रैली, बाकी सबकी रेल बना दो
ऐसा करो चुनावों पर ही बुलडोजर चलवा दो
ना समस्या बचे ना ही समाधान
ये जादू मन्तर कैसे सीखा
✍️ चिराग़ जैन

चुनाव के बाद

जीत और हार के शोर-शराबे के बाद यकायक राजनैतिक गलियारों में सन्नाटा पसर गया है। जीतनेवाले इतने स्पष्ट बहुमत से जीते हैं कि मीडिया के पोस्ट इलेक्शन अलायंस और हॉर्स ट्रेडिंग जैसे कैप्सूल धरे के धरे रह गये हैं।
यही स्पष्ट बहुमत वर्तमान लोकतंत्र की दरकार है। आरोप-प्रत्यारोप जैसे तमाम हो-हल्ले पर चुनाव परिणाम ने पूर्णविराम लगा दिया है।
इसका यह कतई अर्थ नहीं है कि अब जीतनेवाले सरकार चलाएँ और बाक़ी सबकी ज़िम्मेदारी ख़त्म हो गयी। जो नहीं जीत सके हैं, उनका उत्तरदायित्व अब और अधिक हो गया है। विपक्ष लोकतंत्र को आकार देनेवाली हथेली है। यदि विपक्ष अपना काम ठीक से न करे तो सत्ता के चाक पर घूमती सरकार बेतरतीब आकार लेने लगेगी।
वर्तमान राजनैतिक चर्चाओं में विपक्ष को सरकार का शत्रु मानने की परंपरा चल निकली है, जबकि विपक्ष लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण अंग होते हुए प्रकारांतर से सरकार का हिस्सा ही है।
विपक्ष को यह समझना होगा कि उसकी भूमिका चाक पर घूमती मिट्टी को लोई को आवश्यक छुअन और दबाव से सार्थक आकार देने तक सीमित है। यदि हथेली मिट्टी की लोई को हटाकर स्वयं चाक पर घूमने का प्रयास करेगी तो स्वयं भी घायल होगी और भविष्य के निर्माण को भी ध्वस्त कर देगी।
इसी प्रकार सरकार को भी यह समझना होगा कि तेज़ गति से घूमती लोई पर यदि कोई अंगुली का दबाव महसूस होने लगा है तो इसका अर्थ है कि अब तंत्र के एक निश्चित आकार में ढलने का समय आ गया है।
हथेली मिट्टी से स्वयं को रिप्लेस न करे और मिट्टी हथेली की छुअन से परहेज न करे तो लोकतंत्र के चाक की गति निर्माण का कारण बन जाएगी।
जनता ने विधायिका की नियुक्ति कर दी है। अब इसके बाद जनता का भाजपाई, कांग्रेसी, सपाई, बसपाई, आपिया या अकाली होना समीचीन नहीं है। अब जनता को भी जनता होकर हर जीते हुए प्रत्याशी को अपना प्रतिनिधि मानकर उसे तंत्र के प्रचालन का अधिकार देना होगा। अब हर जीते हुए प्रत्याशी को भी जनता को ‘पाँच वर्ष के लिए अनावश्यक’ समझने की बजाय सर्वाेच्च सत्ता समझते हुए प्रत्येक निर्णय से पूर्व इस सर्वाेच्च सत्ता के प्रति उत्तरदायित्व बोध से युक्त रहना होगा।
-सत्ता को यह मानना होगा कि सवाल पूछनेवाला हर व्यक्ति सरकार का विरोधी नहीं है।
-विपक्ष को यह मानना होगा कि सरकार के प्रत्येक निर्णय का विरोध आवश्यक नहीं है।
-जनता को यह जानना होगा कि विपक्ष के अभाव में कोई भी सत्ता जनता की बात नहीं सुन सकती।
-मीडिया को यह समझना होगा कि हर बुलेटिन में शोर भर देने का नाम पत्रकारिता नहीं है।
-साहित्य को यह स्वीकारना होगा कि नारे, जयकारे, आरती, चालीसा और गाली को कभी साहित्य नहीं कहा जाएगा।

© चिराग़ जैन

मतदान

वोटिंग के दिन उंगली पर जो स्याही का निशान बनता है, वही निशान एक दिन लोकतन्त्र का राजतिलक सिद्ध होगा।

✍️ चिराग़ जैन

टिकट लेते आना

चाहे झूठ बोल के, चाहे भेद खोल के
लेते आना, टिकट लेते आना

तुम साइकिल पर पर चढ़ जाना
इक टोपी लाल लगाना
थोड़ा डण्ड पेल के
थोड़ा दण्ड़ झेल के
लेते आना
टिकट लेते आना

तुम कमल का फूल खिलाना
पूरे भगवा रंग जाना
जय श्री राम बोल के
जट श्री श्याम बोल के
लेते आना
टिकट लेते आना

तुम बिन मतलब ही लड़ना
पंजे की उंगली पकड़ना
बिंदी साथ लेके
चूड़ी हाथ ले के
लेते आना
टिकट लेते आना

जनता की बात न करना
असली मुद्दों से बचना
कभी जेब फाड़ के
कभी झोला झाड़ के
लेते आना
टिकट लेते आना

✍️ चिराग़ जैन

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