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आपदा-प्रबंधन

संकट हो कोई समक्ष खड़ा
या फिर घिर आए युद्ध बड़ा
जीवन की हर कठिनाई से
मानव का पुत्र सदैव लड़ा
मानवता का इक दिव्य भाव, अंतस् में धारण कर लेंगे
आपदा अगर कोई आई, मिल-जुल के निवारण कर लेंगे

सागर ने लांघी मर्यादा
सूनामी यम का रूप बनी
भूकम्पों की मनमानी से
जब धरा मृत्यु का कूप बनी
मानवता एक हुई सारी
विपदा उसके आगे हारी
सब मतभेदों का तिरस्कार, जीवन के कारण कर लेंगे
आपदा अगर कोई आई, मिल-जुल के निवारण कर लेंगे

जब जीवनदायी मेघ फटें
अम्बर से मौत बरसती हो
नदियाँ सुरसा का रूप धरें
धरती किसान को ग्रसती हो
पर्वत से गिरे शिला भारी
शहरों को डसे महामारी
मानवता की रक्षा हित हम, हर स्वार्थ समर्पण कर लेंगे
आपदा अगर कोई आई, मिल-जुल के निवारण कर लेंगे

जगती का कष्ट मिटाने को
शिव हालाहल पी जाते हैं
कान्हा गोकुल की रक्षा में
पर्वत का बोझ उठाते हैं
अस्थियाँ दान जहाँ ऋषि करें
और जनक खेत में कृषि करें
यदि समय त्याग का आया तो, हम याद कोई क्षण कर लेंगे
आपदा अगर कोई आई मिल-जुल के निवारण कर लेंगे

✍️ चिराग़ जैन

दिल्ली

वे भी दिन थे
जब पुरानी दिल्ली की
तंग गलियाँ
अकारण ही मुस्कुरा देती थीं
नज़र मिलने पर
अजनबियों से भी।

दरियागंज की हवेलियाँ
अक्सर देखा करती थीं
एक कटोरी को
देहरी लांघकर
इतराते हुए
दूसरी देहरी तक जाते
कुछ दशक पहले तक।

शाहदरा के बेतरबीब मकान
चिलचिलाती धूप में अक्सर
दरवाज़ा खोलकर
बिना झल्लाए
तर कर देते थे
अजनबियों का गला
ठण्डे-ठण्डे पानी से।

करोल बाग़ की सड़कें
अनायास ही जुट जाती थीं
मुसीबत में खड़े
मुसाफ़िरों की मदद के लिए!

लेकिन अब दिल्ली
दो पल ठहर कर
किसी को रास्ता नहीं बताती है।
अब एक्सीडेंट देखकर भी
गाड़ियों की कतारें
(न जाने
कहाँ पहुँचने की जल्दी में)
फर्राटे से निकल जाती हैं।

अब कोई किसी प्यासे को
पानी नहीं पिलाता
और तो और
अब तो कोई प्यासा
पानी पीने के लिए
किसी का
दरवाज़ा भी नहीं खटखटाता।

शाहदरा और
उत्तम नगर की
कस्बाई गलियाँ
धड़धड़ाती मैट्रो में सवार होकर
गड्ड-मड्ड हो जाती हैं
साउथ-एक्स
और नेहरू प्लेस की
शहरी भीड़ में।

अब इन गलियों के पास
नहीं बचा है वक़्त
चाय की चुस्कियों के साथ
‘जनसत्ता’ पढ़ने का।

अब तो
फटाफट न्यूज़ का
दस मिनिट का बुलेटिन
देख पाते हैं
बमुश्किल।

दरियागंज की हवेलियों में
अब गोदाम हैं
किताबों के
काग़ज़ के
और रुपयों के।

पुरानी दिल्ली की तंग गलियाँ
अब तंग आ चुकी हैं
अजनबियों से।

हुक्के की गुड़गुड़ाहट पर
कब्ज़ा कर लिया है
‘आइए भैनजी,
सूट देखिये!’
-की आवाज़ ने।

मुद्दतों से
ग़ज़ल नहीं इठलाई है
बल्लीमारान की
गली क़ासिम में
अब यहाँ
जूतियों का
इंटरनेशनल बाज़ार है।

✍️ चिराग़ जैन

युवा हो गया मीडिया

पिछले दिनों फैशन टीवी पर यह कहकर प्रतिबंध लगाया गया कि उस पर फैशन कार्यक्रमों की आड़ में अश्लीलता परोसी जा रही है। प्रतिबंध लगा और हट भी गया; लेकिन इससे किसी को कोई फ़र्क़ नहीं पड़ा। क्योंकि अब हमारे देश का दर्शक वर्ग उत्तेजक दृश्यों के लिए कुछ गिने-चुने अंग्रेज़ी चैनल्स पर ही निर्भर नहीं रह गया है। न्यूज़ मीडिया ने अंग्रेज़ी चैनल्स के एकाधिकार को समाप्त कर दिया है। अपराध बुलेटिनों के नाम पर रोज़ रात को सोने से पहले किसी के यौन-शोषण, अश्लील एमएमएस, बलात्कार, अवैध सम्बन्ध, देह व्यापार और बार डांस की घटनाओं का जो परत-दर-परत विश्लेषण दिखाया जाता है वह देश में वीटीवी, एमटीवी, एफटीवी और इस प्रकार के अन्य विदेशी चैनल्स के महत्व को कम करने के लिए पर्याप्त है।
जो कुछ क़सर इस क्षेत्र में बाक़ी थी भी उसको पूरा करने के लिए देश भर के सिने कलाकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रसेवा की भावना से भर कर मीडिया का साथ देने का निश्चय किया है। जिस दिन दुर्भाग्यवश उक्त क़िस्म की कोई घटना प्रकाश में आने को तैयार नहीं होती उस दिन कोई न कोई सेलिब्रिटी किसी न किसी कार्यक्रम में किसी न किसी सेलिब्रिटी को चूम लेती है, और हो जाता है संकट का समाधान। इस प्रकार यौन-विषयों पर शोध कर रहे आधुनिक वात्स्यायनों की भीष्म प्रतिज्ञा खंडित होने से बाल-बाल बच जाती है। यदा यदा हि यौनस्य, ग्लानिर्भवति चैनलः…….
कुल दस सेकेण्ड के चुम्बन कांड को 13-14 घंटे तक कैसे दिखाना है इस कार्य में हमारे मीडिया ने वीरगाथा काल के कवियों से विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया है। पहले डेढ़-दो घंटे तक चुम्बन दृश्य का रीप्ले होता है और पीछे से एंकर की आवाज़ रनिंग कमेंट्री की तर्ज पर निरंतर सुनाई देती है- ”आप देख सकते हैं कि किस प्रकार ‘सरेआम’ शिल्पा शेट्टी को अअअ….. आलिंगन में भरते हुए ‘किस्स्स’ किया रिचर्ड ने। (रीप्ले) ….एक बार फिर हम अपने दर्शकों को दिखा रहे हैं ताज़ा तस्वीरें पूरे घटनाक्रम की….. एड्स अवेअरनेस का कार्यक्रम था जिसमें रिचर्ड ने मंच पर ही ‘सरेआम’ शिल्पा शेट्टी को किस किया। (रीप्ले) …..एक बार फिर से देखिए वो तस्वीरें जिसमें मुस्कुराते हुए रिचर्ड गेरे बिना किसी हिचकिचाहट के ‘सरेआम’ शिल्पा शेट्टी को चूम रहे हैं…………….. किसी भी तरह की कोई झिझक या तनाव नहीं दिखाई दे रहा है शिल्पा के चेहरे पर।“
इस प्रकार जब उस दृश्य को देखकर बोले जा सकने वाले तमाम वाक्य दर्शकों को कंठस्थ हो जाते हैं तब तक गैस्टगण स्टूडियो में पहुँच चुके होते हैं। फिर इस मुद्दे पर ज़बरदस्त बहस होती है। फिर उन लोगों से सम्पर्क किया जाता है जो बुद्धिजीवी होते हुए भी कुछ विशेष आर्थिक कारणों से स्टूडियो तक नहीं पहुँच सके। उसके बाद सीन पर मौजूद हस्तियों से सम्पर्क साधा जाता है। और ख़बर के सभी पक्षों का मत जानने के लिए घटनास्थल पर मौजूद पत्रकार कार्यक्रम मंे मौजूद दर्शकों से बातचीत करता है-
“आप उस समय कार्यक्रम में मौजूद थे जब रिचर्ड ने शिल्पा को किस किया?”
“जी हाँ। मैं उस समय आगे से दूसरी पंक्ति में आठवीं कुर्सी पर पैर ऊपर करके बैठा था। और उस समय मेरी गर्दन…….”
“तो आप यह बताइये कि कैसे हुआ ये सारा घटनाक्रम?”
“…..बस शिल्पा शेट्टी ने रिचर्ड गेरे को मंच पर बुलाया और फिर रिचर्ड गेरे ने आकर शिल्पा शेट्टी का हाथ पकड़ लिया और फिर उसको अपनी ओर खींच लिया और गले लगा लिया जी। अजी शिल्पा शेट्टी चाहती तो उस अंग्रेज को थप्पड़ मार सकती थी लेकिन जी उसको तो इस सबकी आदत है जी।”
इसके बाद पत्रकार और एंकर के बीच कुछ अध्यक्षीय स्तर की बातचीत होती है। इस प्रकार 12-13 घंटे के कठोर परिश्रम के बाद पत्रकारों का पूरा दल प्रदत्त विषय पर पूरा शोधग्रंथ तैयार कर देता है।
ऐसा ही एक अन्य उदाहरण पिछले दिनों एक दक्षिण भारतीय अभिनेत्री के अश्लील एमएमएस का हो सकता है। किसी मसाज पार्लर में बने इस एमएमएस का शालीनीकरण कर सभी न्यूज़ चैनल्स ने प्रसारित किया। इस के साथ ही सनद स्वरूप उक्त अभिनेत्री के किसी पुराने एमएमएस की भी झलक दिखाई गई जिसमें उसको नहाते हुए दिखाया गया था। इन दोनों ही कार्यक्रमों को प्रसारित करते समय स्क्रीन के कुछ हिस्सोें को अर्द्धपारदर्शी पट्टी से ढँक दिया गया था और साथ ही हैडर और फूटर में उन वेबसाईट का नाम दिया गया था जहाँ से न्यूज़ चैनल्स ने उक्त क्लिप्स ‘साभार’ प्राप्त की थी।

यह तो था प्रदर्शित सत्य। लेकिन इन दृश्यों के साथ वेबसाइट्स का नाम देने के पीछे एक मूक संदेश था- “प्रिय दर्शको! कुछ अनर्गल कानूनों की वजह से हम आपको ये दृश्य पूरी तरह नहीं दिखा पा रहे हैं। इसके लिए हम क्षमाप्रार्थी हैं। लेकिन आपकी सुविधाओं और रुचियों का ध्यान रखते हुए हमने इस कार्यक्रम का प्रसारण ऐसे समय पर किया है जब सभी सरकारी कार्यालय बन्द हो चुके हैं। सो इससे पहले कि हमारे चैनल पर प्रसारित होने के कारण इस ख़बर पर कोई कार्रवाई हो और सरकार उक्त वेबसाइट को बैन कर दे, आप तुरन्त अपना इन्टरनेट खोलिए और इन क्लिप्स को डाउनलोड कर लीजिए। आपके पास पूरे 12 घंटे का समय है। आपका समय शुरू होता है अब…… काल करै सो आज कर, आज करै सो अब, पल में एक्शन होएगा, लाॅगिन करेगा कब।“
राखी सावंत, मल्लिका शेरावत, नेहा धूपिया, बिपाशा बासु, करीना कपूर, इमरान हाशमी, मिक्का, शाहिद कपूर, शक्ति कपूर, अनारा गुप्ता और अन्य समाज सेवक जब तक मौजूद हैं तब तक मीडिया का यह शोध अनवरत ज़ारी रहेगा।
दरअसल ऐसी की ख़बरों में समाचार चैनल्स की विशेष रुचि का कारण यह है कि इस क़िस्म की एक ही ख़बर मीडिया के तीनों लक्ष्यों (शिक्षा, सूचना और मनोरंजन) को लक्ष्य करती है। समाचार जगत की अन्य किसी विधा में इतना बूता नहीं है।

इस सारी समीक्षा का लब्बोलुआब यह है कि हमारा मीडिया पूरी तरह जागृत है और मैच्योर हो गया है। यही कारण है कि अपने बचपन के दौर में भारतीय पत्रकारिता देशभक्ति के गीत गाती थी, और यौवन आते ही मीडिया काॅलेज लाइफ को एन्ज्वाय करने लगा है सो देशभक्ति की बोर और बचकानी बातों की संकीर्ण मानसिकता से बाहर आकर ग्लोबल वे में उन विषयों पर खुलकर चर्चा करने लगा है जिन्हें छूना बच्चों के लिए निषेध होता है। शरीर विज्ञान की भाषा में कहें तो मीडिया में अब हार्मोनल चेंज आ गए हैं।

✍️ चिराग़ जैन

होली

सबके जीवन में भरें पावनता के रंग
ऐसी रंगत लाए अब, होरी अपने संग

अब ऐसे मनने लगा, होली का त्यौहार
चेहरे स्याह-सफेद हैं, रंगे हुए अख़बार

भूले से भी मत करो, पॉवर का मिस-यूज़
भस्म हो गई होलिका, उड़ा पाप का फ्यूज़

✍️ चिराग़ जैन

मेहमानों का आना-जाना

वो, जिनके घर मेहमानों का आना-जाना होता है
उनको घर का हर कमरा, हर रोज़ सजाना होता है
जिस देहरी की किस्मत में स्वागत या वंदनवार न हो
उस चौखट के भीतर केवल इक तहख़ाना होता है

✍️ चिराग़ जैन

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