Article, Chirag Jain Writings, Kohra Ghanaa Hai, Prose
प्रधानमंत्री ने विश्व भर में घूम-घूमकर देश की छवि सुधारी है। और छवि वास्तव में सुधरी भी है, लेकिन देश नहीं सुधरा। हम आज भी किसी देवता की तस्वीर को चप्पल से पीटकर अपने दलित होने की कुंठा निकाल रहे हैं। हम भगवान की तस्वीर पर जूते फेंककर सरकार से आरक्षण बहाल रखने की फिरौती मांग रहे हैं। यह सब देखकर बाबा भीमराव अंबेडकर फूले नहीं समा रहे होंगे। रेलगाड़ियाँ रोक दी गई हैं। बाज़ार बन्द पड़े हैं। सड़कों पर हथियारबंद गुंडे गुंडई कर रहे हैं। इन सबको गुंडागर्दी का आरक्षण चाहिए। ये सब बाबा अम्बेडकर के संविधान की धज्जियाँ उड़ाने की स्वतंत्रता चाहते हैं। ये चाहते हैं कि जब पुलिस इन्हें हायतौबा करने से रोके तो संविधान पुलिस के हाथ बांध दे, लेकिन संविधान इन्हें हिंसा करने से रोके तो ये संविधान का बोरिया बांध दें।
सरकार इन्हें नहीं रोकेगी। वह माननीय न्यायालय से कहेगी कि अगले चुनाव में हमें इन लड़कों से विजय की पालकी उठवानी है इसलिए हम इन्हें बहन-बेटियों की इज़्ज़त लूटने से नहीं रोकेंगे सो तुम्हारे पास दो ही उपाय हैं या तो अपनी बहू-बेटियों को घर में घोंट दो या फिर इन लड़कों को आरक्षण की रिश्वत देकर विदा कर दो। न्यायालय सरकार को फटकारता है। सरकार आँसू बहाते हुए आरक्षण मांगनेवाली भीड़ को बताती है कि हमने तुम्हारी बात रखी तो हमें न्यायालय ने डाँट दिया। सुनकर हथियारबंद गुंडों का मन पिघल जाता है। वे न्यायालय की ज़्यादतियों से टूट जाते हैं और जिलाधीश का दफ्तर फूँक देते हैं। वे बेबस होकर बसें जलाने पर मजबूर हो जाते हैं। न्यायालय से न्याय न मिलने की पीड़ा से त्रस्त होकर वे बेचारे, आम लोगों से मारपीट करते हैं।
वे ब्राह्मणों के आराध्य को चप्पल से पीटते हैं। वे हिन्दू-देवी देवताओं को अपमानित करते हैं। इससे क्रुद्ध होकर हिंदुओं का खून खौल जाता है। उनके भीतर परशुराम उतर आते हैं। वे भीमराव अंबेडकर और कांशीराम की मूर्तियों पर कीचड़ उछालते हैं।
उधर पटेल, जाट, गुर्जर समुदाय इन सब घटनाक्रमों का महीन अध्ययन करते हुए अपने लिए आरक्षण की रणनीति बनाते हैं। माननीय न्यायालय सरकार की ओर देखता है और सरकारें वोटबैंक की ओर। आंदोलन के बैनरतले होनेवाले फसादात का धुआँ आकाश में छाने लगता है और विश्व में भारत की छवि सुधरने का परचम धूसर हो जाता है।
हाँ, इस सबके बीच स्कूल गए बच्चों की, दफ़्तर के लिए निकले बेटे की, टूर पर गए पति की और गश्त पर गए पिता की चिंता में कुछ आँखें राह देखती रह जाती हैं। इस सबके बीच कोई नन्हा फरिश्ता दुनिया में आने से पहले ही आँखे मूंद जाता है। इस सबके बीच किसी चायवाले के घर चूल्हा नहीं जल पाता। इस सबके बीच किसी गोलगप्पेवाले का ठेला उदास खड़ा रह जाता है। इस सबके बीच कोई दर्द दवा तक नहीं पहुँच पाता है। इस सबके बीच कुछ मेहनतकशों की मजूरी नहीं हो पाती। इस सबके बीच कुछ अहम ज़रूरतें पूरी नहीं हो पातीं।
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Geet, Lapete Mein Netaji, Poetry
पूरी राजनीति हो गई मवाली,
सभी के सब जाली
हैं होली के रंग रसिया
एक-दूसरे को मार मार ताली,
सुनावें रोज़ गाली
ये ठीक नहीं ढंग रसिया
अभी चाय का शोर थमा था, तभी पकौड़ा आ पहुंचा
देसी गदहे नहीं चले तो, अरबी घोड़ा आ पहुंचा
नरसिम्हा से मुक्त हुए तो देवेगौड़ा आ पहुंचा
पहला पकड़ा नहीं गया था, नया भगौड़ा आ पहुंचा
जाने कैसी करी रे रखवाली,
थमा के उन्हें ताली
क्यों छान रहे भंग रसिया
पहले हमसे वोट, अनोखे स्वप्न दिखाकर छुड़वा ली
कांग्रेस की करतूतों का राग सुनाकर छुड़वा ली
भारत में रहकर दी राहत, बाहर जाकर छुड़वा ली
सब्सिडी भी ऊँची-ऊँची बात बनाकर छुड़वा ली
करी डीजल की टंकी भी खाली,
चिढ़ाने लगी थाली
ज़माना हुआ तंग रसिया
हाथ बांधकर घर बैठे हैं लालकृष्ण आडवाणी जी
अच्छे अच्छे मांग गए थे जिनके आगे पानी जी
बंद कर दिए नोट अचानक खूब करी मनमानी जी
सबको समझा दिया मिनिट में माया आनी जानी जी
सबने सड़कों पे लाइनें लगा ली,
मशीनें नोटों वाली
महीनों रहीं दंग रसिया
मंगलयान गया तो उसका पूरा क्रेडिट ले भागे
बुलेट ट्रेन को कर्जा लेने तुम दौड़े आगे-आगे
जिसने तुम पर प्रश्न उठाया उस पर ही गोले दागे
न्याय मीडिया तक आ पहुंचा बस उस रोज़ नहीं जागे
बेच खाई विरोधियों की गाली,
बिगड़ती संभाली
तू पूरा मलंग रसिया
सुखरामों की किस्मत खुल गई, मुफ़्ती से इंसाफ हुआ
नीतिश बाबू से झगड़े का ऊँचा पर्वत हाफ हुआ
अच्छा-बुरा चरित्र धुल गया, नीति-नियम का लाफ़ हुआ
जिसने बीजेपी जॉइन की उसका दामन साफ हुआ
आधी कांग्रेस खुद में मिला ली,
ये चाय वाली प्याली
हुई है बदरंग रसिया
योगी ने भगवा रंग डाला बाकी रंग निचोड़ दिया
अमित शाह ने हर प्रदेश में बीजेपी बम फोड़ दिया
नोट बंद कर जीएसटी से सब व्यापार झिंझोड़ दिया
जनता की पॉकेट पे तुमने अरुण जेटली छोड़ दिया
हाय कैसी ये चौकड़ी बना ली,
हुए हैं सब ठाली
मचाया हुड़दंग रसिया
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Ghanakshari, Lapete Mein Netaji, Poetry
यौवन के हाथ करछी-कड़ाही में घिरे तो
सीमाओं पे शत्रुओं के बान कौन थामेगा
चटनी के स्वाद चखने लगी जवानी गर
बैरियों की तिरछी जुबान कौन थामेगा
जनता के दुःख देखकर जब धरती पे
फटने लगेगा आसमान; कौन थामेगा
देश के युवा यदि पकौड़े बेचने लगे तो
देश के विकास की कमान कौन थामेगा
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Ghanakshari, Lapete Mein Netaji, Poetry
जिनके इशारों पर नाचता था भ्रष्टतंत्र
कैश के बिना सभी रिमोट बंद हो गये
वोट फोर नोट की जो करते थे राजनीति
उन मायाधारियों के वोट बंद हो गये
डाकुओं का कैश से हुआ है ऐसा मोहभंग
सरे-आम लूट व खसोट बंद हो गये
पर्दे के पीछे काफ़ी कुछ अभी भी है बंद
जनता को लगता है नोट बंद हो गये
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Lapete Mein Netaji, Prose, Quotation
8 NOV
एक सप्ताह से काला धुआँ आँखों में जल रहा था, अब नारंगी और हरे नोट आँखों में चुभ रहे हैं।
जितने का पेट्रोल भरवा सकते हो भरवा लो, बाकी में पैट्रोल डाल कर आग लगा दो।
आदेशानुसार : मोदी उर्फ़ धो दी।
प्रधानमंत्री जी करुणानिधान हैं, वे जानते थे कि दिल के दौरे वाले मरीज़ 100 रूपये के नोट नहीं जुटा पाएंगे इसलिए अस्पतालों में काले नोट स्वीकार्य हैं।
मोदी जी की इमेज उस बच्चे की तरह हो गई है जो अपनी हर अगली शरारत से पिछले काण्ड को छोटा सिद्ध कर देता है।
इस बीच विजय माल्या ने स्टेट बैंक के जीएम से बोला है कि अपना 1700 करोड़ रुपैया लेना हो तो कल कूड़ेदानों में से बीन लेना। फिर मुझे मत बोलना कि पैसा नहीं दिया।
उधर पाकिस्तान में इस बात की खलबली है कि जो आदमी एक झटके में अपने 1000-500 के नोट की वैल्यू दो कौड़ी की कर सकता है वो हमारे दो कौड़ी के देश का क्या करेगा!
9 NOV
बॉर्डर फ़िल्म का डायलॉग याद आ गया-
सुबह नाश्ता करते हुए पोलीपैक दूध बैन कर दूंगा।
दोपहर के लंच में इंजन वाले वाहनों पर रोक लगा दूंगा। और रात के खाने मेंमिल में बना कपड़ा बंद कर पूरे देश को पेड़ के पत्ते लिपटवा दूँगा।
जसोदाबेन ने मोदी जी को फोन करके पूछा है – 1000 और 500 के नोटों ने भी तुमसे शादी कर ली थी क्या?
कुछ ख़ास बात नहीं है। करेंसी नोट का रंग रूप अमरीका जैसा बनाने के चक्कर में मोदी जी ने कच्चे के व्यापारियों की शक्ल सोमालिया जैसी बना दी।
अब तो लोग दो दिन की सब्ज़ी भी इकट्ठी नहीं ख़रीद रहे, पता नहीं मोदी जी कब लौकी को ग़ैर कानूनी घोषित कर दें।
मन की बात कोई सुन नहीं रिया था तो मेरे भाई ने मनी की बात कर दी।
लब्बो-लुआब : हज़ार और पाँच सौ के नोट एक साथ बंद कर दिए जाएं तो दो हज़ार का नोट पैदा हो जाता है।
स्मॉग हटते ही मोदी जी ने दिन में तारे दिखा दिए।
हज़ारीप्रसाद द्विवेदी जी ने काफी माखनलाल चतुर्वेदी जी लगाए लेकिन बनारसी दासने अमीर ख़ुसरो जी को भिखारी ठाकुर बनाने का फैसला वापस नहीं लिया। अब पूराभारतेंदु हरिश्चंद्र इस फ़िराक़ गोरखपुरी में है कि अपने मैथिली शरण गुप्त धनको उजागर करके मन को निर्मल वर्मा कर लें।
बिगड़ी हुई औलाद को सुधारने के लिए जेबख़र्च बंद करने का उपाय हमेशा कारगर होता है।
10 NOV
8 नवंबर को मोदी जी ने जनता बोला – 1000-500 के नोट काग़ज़ के टुकड़े रह जाएंगे।
9 नवम्बर को न्यायालय ने सरकार से पूछा – pollution कण्ट्रोल का मास्टर प्लान बताओ?
मतलब, सब जानते हैं कि नोट जलेंगे से धुआँ होगा ही होगा।
वो कौन सा दार्शनिक था जो कह कर गया था कि पैसा तो सड़कों पर बिखरा पड़ा है, समेटने के लिए हिम्मत चाहिए। निंद्य है।
✍️ चिराग़ जैन