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कौन पूछे हाल प्यादों का

एक राजा, एक रानी
कुछ वज़ीरों की कहानी
चंद घोड़े, चंद हाथी
बस यही है राजधानी
ऊँट रस्ता तक रहे, चुपचाप भादों का
कौन पूछे हाल प्यादों का

कोई मजबूरी जताकर मार डालोगे हमें तुम
कल बिसातों पर मगर फिर से सजा लोगे हमें तुम
दाँव पहला, हर दफ़ा हम ही चलेंगे खेल में पर
हम घिरे तो खेल से बाहर निकलोगे हमें तुम
जानते हैं रंग हम सबके लबादों का
कौन पूछे हाल प्यादों का

हाँ, ज़माने के लिए तुम हर तरह हम से बड़े हो
पर हक़ीक़त में हमारी ओट में दुबके पड़े हो
जंग के मैदान में दोनों तरफ़ से घिर गए हम
सामने दुश्मन खड़ा है, और पीछे तुम खड़े हो
वार सहना है हमें सबके इरादों का
कौन पूछे हाल प्यादों का

भूलना मत, हम नहीं हैं अब तुम अपने आसरे हो
भूलना मत, जिस जगह हम थे, वहाँ अब तुम धरे हो
भूलना मत ढाल तुमको, बोझ लगने लग गई थी
हम तुम्हारे मोहरे थे, तुम किसी के मोहरे हो
अब दिखेगा नूर सारे शाहज़ादों का
कौन पूछे हाल प्यादों का

✍️ चिराग़ जैन

फिर नई शुरुआत

थम गया संसार सारा
हो रहा ओझल किनारा
साँस डर कर ले रहे हैं
विष घुला है हर नज़ारा
किन्तु हम ख़ुद को पुनः सुकरात कर लेंगे
फिर नई शुरुआत कर लेंगे

मानते हैं, आदमी से भूल भारी हो रही थी
एक अंधी दौड़ की सब पर ख़ुमारी हो रही थी
इस हवस का अंत होगा, होड़ का अवसान होगा
फिर नई दुनिया बसेगी, फिर सृजन का गान होगा
खेत, वन सबका सही अनुपात कर लेंगे
फिर नई शुरुआत कर लेंगे

देख लेना इस नए जग की सुरीली तान होगी
श्वास में विश्वास होगा, आँख में मुस्कान होगी
प्रेम का व्यवहार होगा, प्रीत का सत्कार होगा
फिर नए बिरवे उगेंगे, फिर नया संसार होगा
हर तरफ़ उल्लास को तैनात कर लेंगे
फिर नई शुरुआत कर लेंगे

लोभ का प्रतिकार करना जानता हो, वो बचेगा
सत्य को स्वीकार करना जानता हो, वो बचेगा
जो बचेगा, वो मनुजता के लिए वरदान होगा
जो बचेगा, वो नए युग का नवल उत्थान होगा
साथ मिलकर फिर वही हालात कर लेंगे
फिर नई शुरुआत कर लेंगे

धड़कनें इस बात की पहचान है, जीवन अमर है
ज़िन्दगी क्या है, शिराओं में लहू का वेग भर है
श्वास में संगीत होगा
धड़कनों में ताल होगी
तन समूचा स्वस्थ होगा
ज़िन्दगी ख़ुशहाल होगी
देह को उपचार में निष्णात कर लेंगे
फिर नई शुरुआत कर लेंगे

✍️ चिराग़ जैन

लाॅकडाउन

ससुरे दफ़्तर है गए बन्द
घर पर बैठे मूसरचन्द
घर पर मूसरचन्द
खाली हो गए सबरे फंड

देसी घी के परठाँ में भी कमी बताने वारे
साँझ-सबेरे लूखी रोटी चाब रहे बेचारे
भूल गए रबड़ी श्रीखण्ड
घर पर बैठे मूसरचन्द
घर पर मूसरचन्द
खाली हो गए सबरे फंड

आसपास की ग्वालिन के संग रास रचाना छूटा
कलियाँ सबरी ग़ायब है गई, भँवरे का दिल टूटा
कलियन को बन गौ गुलकंद
घर पर बैठे मूसरचन्द
घर पर मूसरचन्द
खाली हो गए सबरे फंड

बीड़ी भई पराई, दारू हुई पहुँच से दूर
सूख-सूख कर भए छुआरे, रस से भरे खजूर
सबका ठंडा हुआ घमंड
घर पर बैठे मूसरचन्द
घर पर मूसरचन्द
खाली हो गए सबरे फंड

✍️ चिराग़ जैन

किस्सों को खूंटी पर टाँको

दूर खड़े रहकर मत आँको
झाँक सको तो मन में झाँको
घटनाओं की परतें खोलो
किस्सों को खूंटी पर टाँको
आँखें क्यों छोटी कर दी हैं, होठों के उल्लास ने
आँसू की नदियाँ ढक ली हैं मुस्कानों के व्यास ने

कैकई मैया का राजा के महलों बीच ठिकाना था
नौकर, चाकर, दास, दासियाँ सबका आना-जाना था
होने को तो उसके आगे सुविधाओं का मेला था
लेकिन मन के भीतर केवल मरघट का वीराना था
पानी तक पहुँची तो बदला रंग पुरानी प्यास ने
आँसू की नदिया ढक ली है मुस्कानों के व्यास ने

अपमानित शकुनी इक ज़िद पर पूरा जीवन वार गया
अपमानित चाणक्य उसी ज़िद पर हर बाज़ी मार गया
विष्णुगुप्त नायक है युग का और शकुनी खलनायक है
इसका मोहरा जीत गया है, उसका मोहरा हार गया
जो भी जीता उसे सिकंदर मान लिया इतिहास ने
आँसू की नदिया ढक ली है मुस्कानों के व्यास ने

क़िस्सा क्या है, आधे सच को ढकता एक झरोखा है
कथा, विजेता की सहमति से होने वाला धोखा है
आँखों देखी को भी बाँचो, किसकी आँखों से देखी
सच जो पर्दे के पीछे है, उसका रूप अनोखा है
वैभव की झोली खाली है, सुख पाया संन्यास ने
आँसू की नदिया ढक ली है मुस्कानों के व्यास ने

✍️ चिराग़ जैन

उसको बदनामी से डर लगता था

पलकों में पलते सपनों की नाकामी से डर लगता था
उसने राह बदल ली, उसको बदनामी से डर लगता था

मैं उसकी आँखों में गुम था, वो सबकी नज़रें पढ़ती थी
मैंने प्यार किया बिन मतलब, वो बिन कारण के लड़ती थी
दुनिया भर की बातें सुनकर आँखों में पानी भरती थी
मैं उसको समझाता था तब जाने क्या सोचा करती थी
जीना-मरना साथ करूँगा, इस हामी से डर लगता था
उसने राह बदल ली, उसको बदनामी से डर लगता था

दुनियावाले क्या सोचेंगे -इसका सोच-विचार बहुत था
हिम्मत करने से बचती थी, वैसे उसको प्यार बहुत था
किस रंग के दरवाज़े होंगे, क्या दीवारों का रंग होगा
कितनी फुलवारी फूलेगी, कैसा फूलों का ढंग होगा
सपनों के इस सुंदर घर की नीलामी से डर लगता था
उसने राह बदल ली, उसको बदनामी से डर लगता था

जब भी प्यार किया जाता है, सोच-विचार नहीं करते हैं
सोच-समझने वाले अक्सर, पूरा प्यार नहीं करते हैं
मर-मिटने का ख़ौफ़ नहीं हो, तब जीना अच्छा लगता है
सपनों में जीकर तो देखो, हर सपना सच्चा लगता है
हर ख़ूबी की चाह थी उसको, हर ख़ामी से डर लगता था
उसने राह बदल ली, उसको बदनामी से डर लगता था

✍️ चिराग़ जैन

मुझे आँसू पचाना आ गया है

पीर से कह दो
मुझे आँसू पचाना आ गया है
अब किसी आघात से घायल नहीं हो पाऊंगा मैं
प्यास को अपने पसीने से बुझाना आ गया है
दोपहर की धूप से बिल्कुल नहीं घबराऊंगा मैं

भाग्य के दरबार से संत्रास लेकर लौट आया
आस के आवास से उपहास लेकर लौट आया
मैं स्वयं में इक नया विश्वास लेकर लौट आया
अब किसी के सामने झोली नहीं फैलाऊंगा मैं

अब समस्या भी मुझे भयभीत कर सकती नहीं है
नियति अब कुछ भी मेरे विपरीत कर सकती नहीं है
हार ने जो कर दिया, वह जीत कर सकती नहीं है
युध्द के परिणाम पर हर हाल में मुस्काऊंगा मैं

आपदा में धीर का व्यवहार करना आ गया है
मुस्कुरा कर दर्द का उपचार करना आ गया है
अब मुझे हर वार को स्वीकार करना आ गया है
डूब कर भी धार के उस पार तो लग जाऊंगा मैं

✍️ चिराग़ जैन

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