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जिस दिन साँस पराई होगी

देह बचेगी स्पर्श न होगा आँखें होंगीं दर्श न होगा सब अपनों के आने का भी मुझको किंचित हर्ष न होगा उस दिन अधरों पर भी कोई याद नहीं मुस्काई होगी जिस दिन साँस पराई होगी जिन होंठों की मुस्कानों से मुझको प्राण मिला करते हैं जिन चेहरों के खिल जाने पर मन के तार हिला करते हैं...

उलाहना

मैं अंधेरों के नगर में दीप धरने जा रहा हूँ तुम उजालों की प्रतीक्षा में समय व्यतीत करना मैं पसीने से नदी का पाट भरने जा रहा हूँ तुम किसी बरसात की मनुहार का संगीत गढ़ना कर्मरत अर्जुन हुआ तो कृष्ण उसके सारथी थे देवता जीवन बदल सकते नहीं केवल भजन से आ गई चलकर अकेली जो गहन...

हर सम्भव के साधन हैं

सपनों की आँखें पथराईं हिम्मत की पाँखें कुम्हलाईं संघर्षों की तेज पवन ने प्राणों की शाखें दहलाईं इन सारे झंझावातों से लोहा लिया ज़मीर ने अमृत सोख लिया रावण का राघव के इक तीर ने राजतिलक की शुभ वेला में राघव को वनवास मिला स्वर्ण जड़ित आभूषण उतरे, जंगल का संत्रास मिला...

समय का बारदाना

जब समय फंदा कसेगा भूमि में पहिया धँसेगा शाप सब पिछले डसेंगे पार्थ नैतिकता तजेंगे उस घड़ी तक जूझने का भ्रम निभाना है सब समय का बारदाना है नीतियों का ढोंग करतीं, सब सभाएँ मौन होंगी न्याय की बातें बनातीं मन्त्रणाएँ मौन होंगी जब प्रणय को भूलकर राघव निरे राजा बनेंगे तब सिया...

अस्तित्वों का महासमर

हम सब इस कारण ज़िन्दा हैं, शायद मर जाना दूभर है दुनियादारी क्या है, केवल अस्तित्वों का महासमर है जब तक सम्भव हो तब तक ये श्वास चलाने को ज़िन्दा हैं तन को इंधन दे पाएँ, बस भूख मिटाने को ज़िन्दा है शायद कुछ ऐसा कर जाएँ, दुनिया जिसको याद रखेगी जीवन भर का जीवन जीकर, फिर मर...

आशाओं पर आघात

पतझर का आना निश्चित था पत्ते झर जाना निश्चित था हरियाली की आशाओं पर, बादल ने आघात करा है आँगन में जो ठूठ खड़ा है, वो सावन के हाथ मरा है दुःशासन ने चीर हरा तो ठीक समय आ पहुँचे माधव भीष्म काल बनकर बरसे तो तोड़ प्रतिज्ञा पहुँचे माधव एकाकी होकर जूझा अभिमन्यु अकेला...
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