+91 8090904560 chiragblog@gmail.com

खालीपन

जिस दरपन ने तुम्हें निहारा, उस दरपन का खालीपन और सघन कर देता है इस अंतर्मन का खालीपन कल तक आंगन में उनके आने की कोई आस तो थी अब तो भुतहा सा लगता है इस आंगन का खालीपन सारा कुछ खोकर भी जाने किसे जीतने निकला हूँ शायद मुझमें घर कर बैठा है रावन का खालीपन मेरा सब कुछ लेकर...

रात से रिश्वत ली है

जीत ने मात से रिश्वत ली है दिल ने जज़्बात से रिश्वत ली है चांदनी कम है अंधेरा ज़्यादा चांद ने रात से रिश्वत ली है फिर से बारिश में चुएगा छप्पर इसने बरसात से रिश्वत ली है सब समय की दुहाई देते हैं सबने हालात से रिश्वत ली है मुझको लगता है मिरी नींदों नें कुछ ख़यालात से...

इक नया रास्ता

ज़िन्दगी जब भी आज़माती है इक नया रास्ता दिखाती है न तो पिंजरे में चहचहाती है न ही अब पंख फड़फड़ाती है जब कभी माँ की याद आती है ये हवा लोरियाँ सुनाती है वो मरासिम को यूँ निभाती है मिरा हर काम भूल जाती है मेरे ख़्वाबों में यूँ वो आती है जैसे पाजेब छनछनाती है लफ़्ज़ मिल पाए तो...

कोशिश

मैं ‘मन’ लिखने की कोशिश करता हूँ ….सिर्फ़ कोशिश। कभी इसका मन कभी उसका मन कभी सबका मन …और कभी-कभी अपना भी मन। इतना ही समझ आता है मुझे कि ‘कोशिश’ और ‘कामयाबी’ उर्दू ज़ूबान के दो अलग-अलग अलफ़ाज़ हैं! ✍️ चिराग़...

अनदेखी

देर तक देखता रहा मैं एक बिन्दु को आशा भरी नज़रों से लगातार। उतनी ही देर तक तकती रहीं दो आँखें छलछलाती हुईं मुझे भी! ✍️ चिराग़...

इलेक्शन

होता तो यही है जी हर बार इलेक्शन में पब्लिक को मनाती है, सरकार इलेक्शन में जनता का ही पैसा है, जनता पे ही शासन है जनता का ही होता है, व्यापार इलेक्शन में कुछ झंडे उठाकर के, कुछ बिल्ले लगाकर के बिन बात ही करते हैं, बेगार इलेक्शन में कुछ रंगे सियारों ने, कुछ नंगे गरीबों...
error: Content is protected !!